18 माह में बनने थे अस्पताल, 40 माह बाद भी विभाग को सुपुर्द नहीं

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फुसरो नगर: वित्तीय वर्ष 2013- 2014 में बेरमो विधानसभा क्षेत्र के बेरमो, जरीडीह, चंद्रपुरा व पेटरवार प्रखंड में करीब 17 स्थानों में लगभग 100 करोड़ की लागत से 30 बेड, छह बेड के अस्पताल, नर्सिंग ट्रेनिंग हॉस्टल के अलावे अस्पतालों में चिकित्सक व कर्मियों के आवास निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गयी. 18 माह की […]

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फुसरो नगर: वित्तीय वर्ष 2013- 2014 में बेरमो विधानसभा क्षेत्र के बेरमो, जरीडीह, चंद्रपुरा व पेटरवार प्रखंड में करीब 17 स्थानों में लगभग 100 करोड़ की लागत से 30 बेड, छह बेड के अस्पताल, नर्सिंग ट्रेनिंग हॉस्टल के अलावे अस्पतालों में चिकित्सक व कर्मियों के आवास निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गयी. 18 माह की समयावधि में बनने वाले इन अस्पतालों के निर्माण में 38-40 माह लग गये. बावजूद इसके अस्पताल भवनों को अब तक संवेदकों ने विभाग को सुपुर्द नहीं किया जा सका है. कई स्थानों पर अब भी कुछ कार्य बाकी रह गये हैं. मरीजों को सुविधाएं मिलनी तो दूर अबतक इनका उदघाटन भी नही हो सका है.
विधायक के गांव में बना अस्पताल भी सुपुर्द नहीं : चंद्रपुरा प्रखंड के अलारगो (गट्टीगढ़ा) में छह करोड़ 72 की लागत से 30 बेड वाला अस्पताल भवन बनकर तैयार है. सिद्धि विनायक कंस्ट्रक्शन ने यह अस्पताल बनवाया है. अस्पताल अबतक विभाग को हैंडओवर नहीं किया जा सका है. इलेक्ट्रिकल काम अभी बाकी हैं. यहां अस्पताल के अलावे डॉक्टरों, पारा हॉस्पीटल स्टाफ के साथ-साथ तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मियों के भव्य आवासीय भवन भी बनाये गये हैं. अस्पताल का शिलान्यास पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह व विधायक जगरनाथ महतो ने वर्ष 2014 में संयुक्त रूप से किया था. विधायक जगरनाथ के गांव अलारगो से थोड़ी दूर पर ही यह अस्पताल बन रहा है.
कहां-कहां बन रहे अस्पताल
वित्तीय वर्ष 2013-14 में चंद्रपुरा प्रखंड के अलारगो में 30 बेड अस्पताल, जैनामोड़ में 30 बेड अस्पताल, गांगजोरी में 30 बेड अस्पताल, बेरमो के बीटीपीएस फेजटू में 30 बेड़ अस्पताल, सिजुआ के घुटवे में छह बेड, पेटरवार प्रखंड की दक्षिणी पंचायत में छह बेड का अस्पताल, अंगवाली में छह बेड का अस्पताल भवन, गंझ़डीह में छह बेड, बलरामपुर में छह बेड, तांतरी दक्षिणी छह बेड, मायापुर में छह बेड, चांदो में छह बेड, बेरमो के गांधीनगर में छह बेड, अंबेडकर चौक छह बेड, सुभाषनगर में छह बेड, ढोरी मैदान के बगल में नर्सिंग ट्रेनिंग हॉस्टल, फुसरो अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में चिकित्सक व कर्मियों के आवासीय भवन निर्माण कार्य आदि की आधारशिला रखी गयी थी. 30 बेड अस्पताल की लागत छह करोड़ 72 लाख थी, जबकि छह बेड वाले अस्पताल भवन निर्माण की लागत 1. 72 करोड की थी. इन सभी स्थानों में मुख्य भवन बनकर तैयार है. जबकि अन्य कई तरह के कार्य बाकी है.
बीटीपीएस : 30 बेड का अस्पताल
बोकारो थर्मल के सीसीएल फेज दो में बन रहे 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माणाधीन है. 21 जुलाई 2014 को तत्कालीन मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने अस्पताल के निर्माण की आधारशिला रखी थी. लगभग सात करोड़ की लागत से बनने वाले 30 बेड के अस्पताल का निर्माण संवेदक ममता इंटरप्राइजेज को 18 माह में पूरा करना था. अस्पताल परिसर में अस्पताल के अलावा डॉक्टरों, पारा हॉस्पीटल स्टाफ के साथ-साथ तृतीय एवं चतुर्थ वर्गयी कर्मचारियों के आवासीय भवन का भी निर्माण किया गया. यहां भी कई तरह के काम बाकी है़.
सिजुआ : छह बेड का अस्पताल
चंद्रपुरा प्रखंड की सिजुआ पंचायत के घुटवे में चंद्रपुरा-बाघमारा मुख्य सड़क मार्ग के समीप लगभग 1.72 करोड़ की लागत से बने छह बेड वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिजुआ के भवन का निर्माण महीनों पूर्व हो चुका है. 18 सितंबर 2014 को इसका शिलान्यास तत्कालीन मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने की थी. 38 माह बाद भी अस्पताल भवन विभाग को सौंपा नहीं जा सका है. कैंपस के बाहर के फर्श पर पीसीसी का काम अभी बाकी है.
चलकरी दक्षिणी : छह बेड का अस्पताल
पेटरवार प्रखंड की चलकरी दक्षिणी पंचायत के कानीडीह में छह बेड वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनकर तैयार है. अबतक अस्पताल का उद्घाटन नहीं हो सका है. इस क्षेत्र में कोई भी सरकारी व निजी अस्पताल नहीं है. ऐसी हालत में अगर यह अस्पताल जल्द चालू हो तो क्षेत्र के लोगों को काफी लाभ मिलता. विस्थापित नेता काशीनाथ केवट ने कहा कि अब तो चोरों की नजर भवन की खिड़की-दरवाजों पर भी लग चुकी है. ऐसे स्थानों में अस्पताल बनाये गये हैं, जहां चिकित्सक तो दूर लोग दिन में भी जाने से डरेंगे.
अंगवाली : छह बेड का अस्पताल
पेटरवार प्रखंड के ही अंगवाली में वर्ष 2014 में ही तत्कालीन मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने लगभग 1.72 करोड़ रुपये की लागत से छह बेड वाले अस्पताल का शिलान्यास किया था. भवन बन भी चुका है. भवन के कई बाहरी कार्य पूरा किये जाने हैं. यह अस्पताल भी हैंडओ‍वर व उद्घाटन के इंतजार में है.
निर्माण में विलंब का कारण
निर्माण कार्य में लगी एजेंसियां निर्माण में विलंब का कारण विभागीय बताती हैं. उनका कहना है कि जब अस्पताल भवनों का शिलान्यास हुआ तो निर्माण कार्य स्वास्थ्य विभाग के अभियंत्रण कोषांग के अधीन था. बाद में इस सेल को भंग कर दिया गया. फिर झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम का गठन कर उसके अधीन कर दिया गया. निगम बनने के बाद फंड की कमी रही. इसका असर निर्माण कार्य पर पड़ा.
विधानसभा समिति से इस बाबत जानकारी व सूची मांगी गयी है कि बेरमो विस क्षेत्र में वर्ष 13-14 में स्वास्थ्य केंद्रों के आधारभूत संरचना में 80 करोड़ रुपये से अधिक का टेंडर तथा वर्क ऑर्डर दिया गया. 18-20 माह में बनने वाले अस्पताल साढ़े तीन साल बाद भी अधूरे है. अगर निर्माण पूरा हुआ तो विभाग को क्यों नही सौंपा गया. संवेदक की लापरवाही है तो उसपर क्या कार्रवाई की गयी है. उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार ने चेहतों को निविदा का लाभ दिलाने का कार्य किया. जिसके कारण संवेदकों ने समय पर काम नही किया. कई पीएचसी व सीएचसी ऐसे जगह बनाये गये जिसका कोई औचित्य नहीं है.
योगेश्वर महतो बाटुल, विधायक, बेरमो
अस्पताल के हैंडओवर व उद्घाटन के बाद सरकार से इसे पीपीपी मोड पर चलाने की मांग की जायेगी. कहा वर्तमान सरकार, संवेदक व विभाग की लेटलतीफी के कारण अबतक जनता लाभ से वंचित है. अस्पतालों के गैर उपयोगी स्थान में निर्माण की बात कही जा रही है. अस्पताल कहीं भी बने, यदि सरकार सिर्फ बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराये तो मरीज इलाज को जरूर पहुंचेंगे.
जगरनाथ महतो, विधायक, डुमरी
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