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नहीं उठी बेटी की डोली, उठ गयी पिता की अर्थी

Updated at : 25 Jul 2014 7:37 AM (IST)
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नहीं उठी बेटी की डोली, उठ गयी पिता की अर्थी

रांची: परिवहन विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी कृष्ण कुमार लाल अपनी बेटी के हाथ पीले नहीं कर सके. गुरुवार को उनका निधन हो गया. रिटायर के बाद मिलनेवाली राशि पर बेटी की शादी निर्भर थी. विभाग का चक्कर काटते-काटते हताश हो गये थे. परिवार के सदस्यों के मुताबिक उन्हें कुल 12 लाख रुपये मिलने थे. इसी […]

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रांची: परिवहन विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी कृष्ण कुमार लाल अपनी बेटी के हाथ पीले नहीं कर सके. गुरुवार को उनका निधन हो गया. रिटायर के बाद मिलनेवाली राशि पर बेटी की शादी निर्भर थी. विभाग का चक्कर काटते-काटते हताश हो गये थे.

परिवार के सदस्यों के मुताबिक उन्हें कुल 12 लाख रुपये मिलने थे. इसी माह चार जुलाई को बेटी की शादी होनी थी. पैसा नहीं मिलने के कारण बेटी की शादी नहीं हो सकी. इसी सदमे में कृष्ण कुमार बीमार पड़ गये. बेटी की डोली तो नहीं उठी, कृष्ण कुमार लाल की अर्थी उठ गयी.

इलाज भी नहीं करा सके : कृष्ण कुमार लाल अगस्त 2013 में सेवानिवृत्त हुए थे. इसके बाद से ही उन्होंने सेवानिवृत्त लाभ के लिए विभाग का चक्कर लगाना शुरू कर दिया था. उनकी बेटी मधु ने बताया कुछ दिन पहले उन्हें बुखार हुआ. डॉक्टर ने कई जांच कराने को कहा. पैसा नहीं होने के कारण पड़ोसियों से पैसा मांग कर जांच करायी. जांच में पीलिया रोग निकला. चिकित्सकों ने अस्पताल में भरती करने की बात कही. पैसे के अभाव में अस्पताल में भरती नहीं करा सके और गुरुवार दोपहर तीन बजे उनका देहांत हो गया.

सरकारी अफसरों को कोस रही थी पत्नी : कृष्ण कुमार लाल अपने पीछे पत्नी आशा और पुत्री मधु कुमारी को छोड़ गये हैं. शोकाकुल पत्नी कह रही थी अब कौन बेटी के लिए लड़का खोजेगा. वह बार-बार सरकार के अधिकारियों को कोस रही थी, जिनके कारण सेवानिवृत्ति के बाद भी रकम नहीं मिली.

बेटी ने दी मुखाग्नि
कृष्ण कुमार लाल का अंतिम संस्कार धुर्वा स्थित श्मशान घाट पर किया गया. बेटी ने ही पिता को मुखाग्नि दी. विभाग के सेवानिवृत्त कर्मियों व आसपास के लोगों ने चंदा कर गाड़ी और लकड़ी की व्यवस्था की थी.

भुगतान के लिए पैसा मांगते हैं अधिकारी
विभाग के पूर्व कर्मी भीम सेन सिंह ने कहा कि इस वर्ष 14 लोग सेवानिवृत्त हुए हैं, लेकिन विभाग द्वारा एक भी सेवानिवृत्त कर्मी को भुगतान नहीं किया गया है. विभाग के कर्मी पैसे के अभाव में मर रहे हैं, लेकिन राशि भुगतान के एवज में सरकारी अधिकारी पैसे की मांग करते हैं.

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