डीटीओ ऑफिस में आदेशपाल करते हैं दस्तावेजों पर हस्ताक्षर

राजेश तिवारी, रांची जिला परिवहन कार्यालय में चतुर्थ वर्गीय कर्मी भी अधिकार का काम करते हैं. इन कर्मचारियों के पास बड़े बाबू और अधिकारियों के काम की जिम्मेदारी होती है. कार्यालय के कमरा नंबर 415 में लाइसेंस वितरण का काम होता है. यहां आदेशपाल के तौर पर नियुक्त हुए शोभेलाल पासवान वाहनों के निबंधन से […]
राजेश तिवारी, रांची
जिला परिवहन कार्यालय में चतुर्थ वर्गीय कर्मी भी अधिकार का काम करते हैं. इन कर्मचारियों के पास बड़े बाबू और अधिकारियों के काम की जिम्मेदारी होती है. कार्यालय के कमरा नंबर 415 में लाइसेंस वितरण का काम होता है. यहां आदेशपाल के तौर पर नियुक्त हुए शोभेलाल पासवान वाहनों के निबंधन से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते पाये जाते हैं.
शोभेलाल राज ट्रांसपोर्ट के कर्मचारी हैं. उनका काम लोगों को लाइसेंस मुहैया करना है. लेकिन वह अस्थायी निबंधन और लर्निग से संबंधित कागजात पर भी हस्ताक्षर करते हैं. नियमत: ऐसे कागजात पर हस्ताक्षर की जिम्मेदारी बड़े बाबू की होती है. जिला परिवहन कार्यालय में बाहरी लोगों का बोलबाला है. इन बाहरी लोगों का विभागीय कार्यो में सीधा हस्तक्षेप होता है.
वे बेखौफ होकर विभागीय कार्य करते हैं. कोई लाइसेंस रजिस्टर में लिखता है, तो कोई ऑनर बुक बनाता है. कार्यालय में पिछले दिनों एक बाहरी व्यक्ति लाइसेंस रजिस्टर लिखता पाया गया. पूछे जाने पर बताया गया कि उसका नाम वीरेंद्र सिंह है. लाइसेंस वितरित करनेवाले चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी से जब उसके बारे में पूछा गया, तो उसने बताया : क्या करें कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए बाहर के एक परिचित को बैठा कर काम निबटा रहे हैं.
बाहरी लोग करते हैं काम
ऑनर बुक और लाइसेंस रजिस्टर में लिखने का काम बाहर के लोगों के भरोसे
कई एजेंट भी हैं सक्रिय
ये लोग हैं सक्रिय
वीरेंद्र यादव, शंकर, उमेश, प्रकाश वर्मा, अनिल गुप्ता व सुदेश. ये सभी कार्यालय के कर्मचारी नहीं हैं. एजेंटों के लाइसेंस बनवाने की जिम्मेदारी सुदेश की होती है.
कुल 11 कर्मचारी
– इनमें नौ राज ट्रांसपोर्ट के हैं
– कार्यालय के अपने दो कर्मचारी
– इसके अलावा नौ कर्मचारी एनआइसी के स्टाफ हैं
पुराने वाहनों का नहीं हो रहा ट्रांसफर
जिला परिवहन कार्यालय में पुराने वाहनों का ट्रांसफर नहीं हो रहा है. 1500 से ज्यादा आवेदन लंबित हैं. यही नहीं डुप्लीकेट व एचपीए का काम भी धीमा है. लंबित मामलों के आंकड़े 1000 से अधिक हैं.
‘‘हम क्या करेंगे, हस्ताक्षर करने को कहा जाता है. बोलेंगे हस्ताक्षर नहीं करने, तो नहीं करेंगे.
शोभेलाल पासवान आदेशपाल
‘‘स्टॉफ की कमी है. पर किसी भी स्थिति में बाहरी को विभागीय कार्य में शामिल नहीं किया जा सकता. अगर ऐसा हो रहा है, तो गलत है. बाहरी व्यक्ति से काम करानेवाले कर्मी को नोटिस दिया जायेगा.
राजेश कुमार डीटीओ
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