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पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती समारोह पर रक्तदान-महादान कार्यक्रम 23 को

Updated at : 21 May 2024 11:00 AM (IST)
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डिमना के देवघर में पंडित रघुनाथ मुर्मू की 119वीं जयंती समारोह पर 23 मई को रक्तदान-महादान कार्यक्रम का आयोजन होगा. इसके साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे.

रक्तदान शिविर का प्रचार प्रसार करते

डिमना के देवघर में पंडित रघुनाथ मुर्मू की 119वीं जयंती समारोह पर 23 मई को रक्तदान-महादान कार्यक्रम का आयोजन होगा. इसके साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे

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जमशेदपुर: डिमना के देवघर में पंडित रघुनाथ मुर्मू की 119वीं जयंती समारोह पर 23 मई को रक्तदान-महादान कार्यक्रम का आयोजन होगा. इसके साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे. इस कार्यक्रम का आयोजन परसी सिंञ चादो गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू महाल माडवा, देवघर की ओर से होगा. देवघर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र परिसर पर पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती समारोह के उपलक्ष्य में दूसरी रक्तदान-महादान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. गांव के माझी बाबा सिमल मुर्मू ने बताया कि आदिवासी समाज के लोगों के बीच रक्तदान के लोगों को जागरूक करने के मकसद से हर साल रक्तदान-महादान कार्यक्रम की शुरूआत की गयी है. लोग रक्तदान की महत्ता को समझ रहे हैं और रक्तदान के लिए आगे बढ़कर आ रहे हैं. बूढ़े बुजुर्ग रक्तदान को लेकर काफी जागरूक हैं. वहीं अब युवा पीढ़ी भी इसमें ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं. इतना ही वे सबसे ज्यादा रक्तदान भी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक समय था जब आदिवासी समाज रक्तदान को लेकर काफी डरता था. जिसकी वजह से कुछेक लोग ही रक्तदान करते थे. लेकिन अब हालात बदल चुकी है आदिवासी समाज खुद तो रक्तदान कर ही रहे है, दूसरे को भी रक्तदान के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. इस तरह हाल के दिनों में समाज में कई बदलाव आया है.
आठवीं अनुसूची में सम्मिलित है संताली भाषा
उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज अपनी हासा-भाषा, समाज व संस्कृति को लेकर शुरू से ही काफी सजग रहे हैं. यही वजह है कि आदिवासी समाज के लोग जहां भी मिले, वे अपनी मातृभाषा में ही बातचीत करते हैं. मौखिक रूप से ज्यादा व्यवहार करने की वजह से इसका वजूद बचा हुआ है. अपनी भाषा के प्रति प्रेम की वजह से संताली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है. वर्तमान समय में संताली साहित्य बहुत समृद्ध और विकसित हो चुका है. संताली भाषा के लेखक व साहित्यकारों को साहित्य अकादमी नई दिल्ली के द्वारा हर साल सम्मानित भी किया जाता है. संताली एकमात्र जनजातीय भाषा है जिसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह मिला है.
निकाली जायेगी ओलचिकी जनजागरण रैली
माझी बाबा ने बताया कि पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर डिमना से गालुडीह के नारगा तक ओलचिकी जनजागरण रैली निकाली जायेगी. गुरू गोमके की तसवीर व ढोल-नगाड़े की साथ बड़ी जनजागरण रैली निकाली जायेगी. इसके माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपनी मातृभाषा संताली की लिपि ओलचिकी लिपि में पठन-पाठन करने के लिए प्रेरित किया जायेगा. रैली में शामिल होने वाले लोग पारंपरिक वेशभूषा में रहेंगे.
गीत-संगीत व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे
सुबह में ओलगुरू पंडित रघुनाथ मुर्मू की पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा अर्चना की जायेगी. उनकी पूजा अर्चना कर समाज के लोग अच्छे कार्य को करने के लिए उनसे आशीष मांगेंगे. वहीं दोपहर में पंडित रघुनाथ मुर्मू की जीवनी पर आधारित विचार गोष्ठी का आयोजन होगा. इसके साथ ही कई प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होगा. शाम में स्थानीय कलाकारों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का आयोजन होगा.
रक्तदान करने वाले युवा होंगे सम्मानित
ट्राईबल ब्लड मैन के नाम से मशहूर राजेश मार्डी ने बताया कि जमशेदपुर ब्लड सेंटर और सामाजिक संस्था नई जिंदगी परिवार के संयुक्त प्रयास से रक्तदान-महादान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. रक्तदान के बाद सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति प्रमाण पत्र और विशेष रूप से उपहार देकर सम्मानित किया जाएगा. कभी भी जरूरत होने पर उन्हें रक्त भी उपलब्ध कराया जाएगा. इस शिविर को सफल बनाने के लिए सुनाराम मुर्मू, विमल मुर्मू, संग्राम सोरेन, ठाकुरा मुर्मू, बबलू टुडू, दिलीप मुर्मू, धीरेन सोरेन, विष्णु मुर्मू समेत अन्य सराहनीय योगदान दे रहे हैं.

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Dashmat Soren

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By Dashmat Soren

Dashmat Soren is a contributor at Prabhat Khabar.

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