Election Commission on Congress: चुनाव आयोग ने कांग्रेस को सुनाई खरी-खरी! मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर जताई आपत्ति

Published by : Pritish Sahay Updated At : 09 Oct 2024 10:07 PM

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Election Commission on Congress: हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजों को लेकर कांग्रेस नेताओं के बयान से चुनाव आयोग नाराज है. EC ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज की है. बता दें, कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल आज नजीतों को लेकर चुनाव आयोग से मुलाकात करने वाला है.

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Election Commission on Congress: हरियाणा चुनाव में मिली हार से कांग्रेस बौखला गई है. एग्जिट पोल के नतीजों से पार्टी ने जो जीत का महल खड़ा किया था वो ताश के पत्तों की तरह बिखर गया. नतीजे आने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने रिजल्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए इसे तंत्र की जीत और लोकतंत्र की हार बता दिया. अब चुनाव आयोग उनके इस बयान को लेकर रेस हो गई है. निर्वाचन आयोग ने इस बयान को लेकर कहा कि हरियाणा चुनाव के नतीजों को अस्वीकार्य बताने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बयान देश के समृद्ध लोकतांत्रिक इतिहास में पहले नहीं सुने गए. आयोग ने कहा कि ये बोलने की स्वतंत्रता की वैधानिकता से भी परे हैं. आयोग ने रमेश और खेड़ा के बयान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे को भी पत्र लिखा है.

चुनाव आयोग ने खरगे को लिखा पत्र
जयराम रमेश और पवन खेड़ा के बयान पर चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा है. जिसमें आयोग ने कहा कि पार्टी नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा की ऐसी टिप्पणियां सही नहीं है. चुनाव आयोग ने कहा कि उसने खरगे और राहुल गांधी के बयानों पर भी गौर किया है. कांग्रेस ने हरियाणा चुनाव के परिणाम को अप्रत्याशित और अनपेक्षित बताया है. कांग्रेस पार्टी ने इसका विश्लेषण करने और अपनी शिकायतों के साथ निर्वाचन आयोग से संपर्क करने का प्रस्ताव रखा है. आयोग ने कहा कि कांग्रेस के 12 सदस्यीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की ओर से बैठक के लिए उससे समय मांगा गया है, जिसमें परिणाम को अस्वीकार्य बताने वाले लोग भी शामिल हैं.

कांग्रेस नेताओं ने लगाए थे आरोप
बता दें, मंगलवार को हरियाणा विधानसभा के नतीजे आने के बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से प्रतिक्रिया दी गई थी. इसी कड़ी में पार्टी नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा मीडिया से बात करते हुए नतीजों को अप्रत्याशित करार दिया था. उन्होंने कहा था कि इसे हम स्वीकार नहीं कर सकते. रमेश ने कहा था कि कई जिलों से गंभीर शिकायत आई है. वहीं पवन खेड़ा ने कहा था नतीजे जमीनी स्तर पर जो हमने देखा उससे पूरी तरह उलट हैं. यह तंत्र की जीत है, लोकतंत्र की नहीं. हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते हैं.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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