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Mumbai Serial Blast Case: 1993 मुंबई बम धमाकों के 4 आरोपी 29 साल बाद गुजरात में गिरफ्तार

चारों आरोपियों की पहचान अबु बकर, सैयद कुरैशी, मोहम्मद शोएब कुरैशी और मोहम्मद यूसुफ इस्माइल के रूप में हुई है. उन्होंने कहा कि ये सभी मुंबई के रहने वाले हैं और मामले में 29 साल से वांछित थे.

By Prabhat khabar Digital
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चारों आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था
चारों आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था
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अहमदाबाद: गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने 1993 में मुंबई में देश को दहला देने वाले शृंखलाबद्ध बम विस्फोट (Mumbai Serial Blast Case) के आरोपी 4 लोगों को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि ये चारों 29 साल तक पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे. आखिरकर इन्हें गुजरात में गिरफ्तार कर लिया गया.

29 साल से फरार थे सभी चार आरोपी

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि चारों आरोपियों की पहचान अबु बकर, सैयद कुरैशी, मोहम्मद शोएब कुरैशी और मोहम्मद यूसुफ इस्माइल के रूप में हुई है. उन्होंने कहा कि ये सभी मुंबई के रहने वाले हैं और मामले में 29 साल से वांछित थे.

सीबीआई को सौंप दिया जायेगा

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित विश्वकर्मा ने संवाददाताओं को बताया कि उन्हें 12 मई को एक गुप्त सूचना के आधार पर अहमदाबाद के सरदारनगर इलाके से गिरफ्तार किया गया. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उनके खिलाफ अभी देश छोड़ने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कथित रूप से पासपोर्ट लेने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. बाद में बम विस्फोटों के मामले में उन लोगों को केंद्रीय जांच ब्यूरो के हवाले कर दिया जायेगा.

इंटरपोल ने जारी किया था रेड कॉर्नर नोटिस

विश्वकर्मा ने बताया कि, ‘अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए, उन्होंने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनवाये थे. इन विस्फोटों के मामले की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अनुरोध पर इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया था.’

क्यों आये थे गुजरात, पता नहीं

उन्होंने बताया कि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वे गुजरात क्यों आये थे? उन्होंने बताया कि उन चारों को भारतीय दंड संहिता की धारा 466, 468 और 120-बी के अलावा पासपोर्ट अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है.

दाऊद के गुर्गा के लिए काम करते थे चारों आरोपी

पुलिस उप महानिरीक्षक (एटीएस) दीपन भद्रन ने बताया कि 1990 के दशक में ये चारों सोने के एक तस्कर मोहम्मद दोसा के लिए काम करते थे, जो धमाकों के मास्टरमाइंड और भगोड़ा आतंकी दाऊद इब्राहीम का गुर्गा था.

आईएसआई ने किया था ट्रेंड

उन्होंने बताया, ‘भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए दोसा ने फरवरी 1993 में चारों को दाऊद से मिलने के लिए पश्चिम एशिया के एक मुल्क में भेजा था. दाऊद के निर्देश पर चारों हथियारों का प्रशिक्षण लेने के लिए पाकिस्तान गये. पाकिस्तान की (जासूसी एजेंसी) आईएसआई ने उन्हें परिष्कृत विस्फोटक उपकरण बनाने और उसका इस्तेमाल करने का भी प्रशिक्षण दिया.’

विस्फोट के बाद अलग-अलग देशों में भागे

अधिकारी ने बताया कि ये चारों भी उस साजिश का हिस्सा थे, जिसे दाऊद और अन्य ने मुंबई में सिलसिलेवार बम विस्फोट करने के लिए रचा था. भद्रन ने बताया कि शृंखलाबद्ध विस्फोटों के बाद उन लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर पासपोर्ट प्राप्त किया और वे पश्चिम एशिया के अलग-अलग देशों में भाग गये.

टाडा अदालत ने ‘भगोड़ा’ घोषित किया

उन्होंने बताया कि विशेष टाडा अदालत ने उन्हें ‘भगोड़ा’ करार दिया. आतंकवाद एवं विध्वंसक गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (टाडा) अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही थी. भद्रन ने कहा, ‘यह जांच का विषय है कि वे भारत कब लौटे हैं और गुजरात में वे क्या कर रहे थे. फर्जीवाड़ा मामले में उनकी रिमांड समाप्त होने के बाद हम उन्हें विस्फोटों के सिलसिले में सीबीआई के हवाले कर देंगे.’

दाऊद और टाइगर मेमन अब भी फरार

उन्होंने कहा कि अबु बकर भी विस्फोटों के बाद हथियारों की एक खेप को समुद्र में फेंकने के मामले में शामिल था. उल्लेखनीय है कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गयी थी, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे. मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने मामले में 100 दोषियों को सजा सुनायी थी. मामले का मुख्य साजिशकर्ता दाऊद इब्राहीम और टाइगर मेमन अब भी फरार है.

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