IARI पूसा की मदद से दिल्ली में पराली से निबटेंगे केजरीवाल, तैयार हुआ 10 हजार लीटर 'बायो डीकंपोजर', 13 को करेंगे छिड़काव की शुरुआत

नयी दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंगलवार को बिहार के समस्तीपुर जिले के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) द्वारा विकसित किफायती 'पूसा डीकंपोजर कैप्सूल' के जरिये गालिब पुर गांव में छिड़काव करने की शुरुआत करेंगे. इससे किसानों को पराली को जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
नयी दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंगलवार को बिहार के समस्तीपुर जिले के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) द्वारा विकसित किफायती ‘पूसा डीकंपोजर कैप्सूल’ के जरिये गालिब पुर गांव में छिड़काव करने की शुरुआत करेंगे. इससे किसानों को पराली को जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
दिल्ली सरकार द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा के सहयोग से 10 हजार लीटर Bio Decomposer तैयार। आगामी 13 अक्टूबर को गालिबपुर गाँव, मटियाला में माननीय मुख्यमंत्री @ArvindKejriwal जी करेंगे छिड़काव की शुरुआत। https://t.co/zca99VzvSS pic.twitter.com/xAeFya85rZ
— Gopal Rai (@AapKaGopalRai) October 11, 2020
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने ट्वीट कर कहा है कि ”पराली गलाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा द्वारा तैयार ‘बायो डिकंपोजर’ का बड़े पैमाने पर नजफगढ़ में दिल्ली सरकार के केंद्र खड़खड़ी नाहर में तैयारी शुरू कर दी गयी है.”
साथ ही उन्होंने कहा है कि दिल्ली सरकार द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा के सहयोग से 10 हजार लीटर ‘बायो डीकंपोजर’ तैयार किया गया है. आगामी 13 अक्तूबर को मटियाला के गालिबपुर गांव में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल छिड़काव की शुरुआत करेंगे.
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, उन्होंने कहा है कि अब तक करीब 1500 एकड़ जमीन पर इस पदार्थ का छिड़काव करने के आवेदन मिले हैं. इस भूमि पर गैर-बासमती चावल उगाया जाता है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के वैज्ञानिकों ने ‘बायो-डीकंपोज़र कैप्सूल’ (जैव-घुलनशील कैप्सूल) विकसित किया है.
उन्होंने कहा है कि इस ‘बायो-डीकंपोज़र कैप्सूल’ का इस्तेमाल तरल पदार्थ बनाने के लिए किया जाता है. इस पदार्थ को जब खेतों में छिड़का जाता है, तो यह फसल के ठूंठ को गला देता है और इसे खाद में तब्दील कर देता है.
गोपाल राय ने कहा, ”हमने अनुमान लगाया है कि इस पदार्थ के माध्यम से दिल्ली में 800 हेक्टेयर कृषि भूमि में पराली का निबटान करने के लिए केवल 20 लाख रुपये की आवश्यकता है. इसमें पदार्थ को तैयार करने, ले जाने और छिड़काव का खर्च शामिल है.” उन्होंने कहा कि अगर यह दिल्ली में कामयाब हो जाता है, तो यह पड़ोसी राज्यों के मुद्दे का बेहतर समाधान हो सकता है.
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