मोबाइल पर व्हाटसएप-फेसबुक लोगों को बांट रहा हृदय, बीपी व शुगर की बीमारी, जानें डॉक्टरों ने क्या बतायी बड़ी बात

मोबाइल पर व्हासएप और फेसबुक लोगों को ह्रदय बीपी और शुगर की बीमारी दे रहा है. देर रात तक मोबाइल पर व्हाटसएप व फेसबुक चलाने वाले लोग इसके शिकार हो रहे हैं. रात में देर तक जगना व देर रात में खानपान सेहत पर बुरा असर डाल रहा है.
कुमार दीपू, मुजफ्फरपुर
मोबाइल पर व्हासएप और फेसबुक लोगों को ह्रदय बीपी और शुगर की बीमारी दे रहा है. देर रात तक मोबाइल पर व्हाटसएप व फेसबुक चलाने वाले लोग इसके शिकार हो रहे हैं. रात में देर तक जगना व देर रात में खानपान सेहत पर बुरा असर डाल रहा है. यही कारण है कि जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी में 30 से 40 प्रतिशत युवा हृदय, बीपी और शुगर की परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं. मेडिसिन विभाग के डाॅ एसके पांडे का कहना है कि बदलती दिनचर्या, धूम्रपान करना, नशे का सेवन, देर रात तक जागने से बीपी, शुगर व हृदय संबंधी परेशानी बढ़ रही है. यह शिकायत खासकर 25 से 45 वर्ष के युवाओं में अधिक देखने को मिल रही है. डाक्टरों का कहना है कि समय पर शुद्ध खान-पान रखें और देर रात तक न जगें.
31 साल युवा को हो रहा ह्दयघात का शिकार
अस्पताल के कॉर्डियाेेलोजी विभाग की ओपीडी में दो दिन पहले 31 साल का युवक हृदयघात की समस्या लेकर पहुंचा था. डाॅक्टरों ने जब उसकी जांच की, तो पता चला कि हृदय को खून की सप्लाई देने वाली एक नस पूरी तरह से ब्लाक है. डाॅक्टरों का कहना है कि ओपीडी में आनेवाले मरीजों में से 30 प्रतिशत मरीज युवा हैं, जो बीपी और हृदय संबंधी परेशानी लेकर पहुंचते हैं. युवाओं में देर रात में खाना-पीना और देर तक जागने की प्रवृत्ति बढ़ रही है यही बीमारियों की असल वजह है. क्योंकि, रात में व्यक्ति को आराम करने का समय होता है. जब व्यक्ति सोता है, तो उसका बीपी कम होता है, हृदय को कम काम करना पड़ता है. जब उस वक्त व्यक्ति जाग रहा होता है, तो हृदय को अधिक काम करना पड़ता है. इस कारण बीपी की समस्या बढ़ने लगती है.
मोबाइल लेकर लोग देर रात तक जागते हैं
देर रात तक जागने की मुख्य वजह मोबाइल बनता जा रहा है. तनाव ,अनिद्रा ह्दय व बीपी संबंधी परेशानियां बढ़ रही है. इसी कारण 30 प्रतिशत युवा हृदय व बीपी की परेशानी लेकर आते हैं. बाहर का खान-पान व बदलती दिनचर्या, शारीरिक मेहनत न करना मनुष्य के रोगी होने का कारण बन रहा है. लोग काम काज से फ्री होते हैं, तो मोबाइल लेकर बैठ जाते हैं. खुद के शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए वक्त नहीं होता. रात 9 बजे काज से फ्री होते हैं, तो मोबाइल लेकर बैठ जाते हैं. खुद के शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए वक्त नहीं होता. रात 9 बजे से 11 बजे के बीच हर व्यक्ति को नींद आती है, पर इस वक्त व्यक्ति कामकाज या फिर मोबाइल, टीवी देखने व्यस्त होता है. इस कारण से समय पर नहीं सोता, जिससे तनाव बढ़ता है.
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