Bihar news:वाटर टेस्टिंग लैब में होगा तालाबों के पानी की जांच, भागलपुर के लेबोरेटरी को बनाया गया नोडल लैब

Updated at : 10 Sep 2022 5:21 AM (IST)
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Bihar news:वाटर टेस्टिंग लैब में होगा तालाबों के पानी की जांच, भागलपुर के लेबोरेटरी को बनाया गया नोडल लैब

Bihar news: तालाबों की जांच के लिए भागलपुर के लेबोरेटरी को नोडल लैब बनाया गया है. यहां भागलपुर समेत बांका, बेगूसराय, खगड़िया व मुंगेर जिले के तालाबों व पोखरों के पानी जांच होगी.

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भागलपुर, ब्रजेश: तालाबों का पानी जहरीला तो नहीं, यह मछली पालन के लिए उपयोगी है या नहीं, यह बतायेगा अब भागलपुर के पीएचइडी का क्षेत्रीय जल जांच प्रयोगशाला. अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने के बाद इसे अब जल जीवन हरियाली अंतर्गत भागलपुर समेत पांच जिले के पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले तालाबों व पोखरों की जल जांच कराने की जिम्मेदारी मिली है. पीएचइडी के अधिकारी के अनुसार जल्द ही सेंपल कलेक्ट कर जल की जांच शुरू करायी जायेगी. यह जांच हर तीन महीने पर होगी. जांच के दौरान देखा जायेगा कि मछली पालन के लिए तालाब कितना उपयोगी है, इसका टेंप्रेचर कितना है एवं पानी में ऑक्सीजन कितना घुला हुआ है.

7 पैरामीटर की होगी जांच

कलर, टेंप्रेचर, डिजाल्बड ऑक्सीजन(डीओ), बॉयोकैमिकल डिमांड (बीओडी), कैमिकल ऑक्सिजन डिमांड(सीओडी), टोटल कॉलीफॉर्म एवं फेकल कॉलीफॉर्म पैरामीटर की जांच होगी.

भागलपुर के लेबोरेटरी को बनाया नोडल लैब

तालाबों की जांच के लिए भागलपुर के लेबोरेटरी को नोडल लैब बनाया गया है. यहां भागलपुर समेत बांका, बेगूसराय, खगड़िया व मुंगेर जिले के तालाबों व पोखरों के पानी जांच होगी.

सेंपलिंग के लिए मिलेगा वाहन

तालाबों के पानी का सेंपलिंग के लिए भागलपुर समेत पांचों जिले को अलग से वाहन मिलेगा. भागलपुर को चार, बांका को एक, बेगूसराय को 6, खगड़िया को 05 एवं मुंगेर को 04 वाहन शामिल है.

जानें, कहां कितनी तालाबों को किया सूचीबद्ध

कुल तालाब : 82

भागलपुर : 52

बांका : 15

बेगूसराय : 06

खगड़िया : 05

मुंगेर : 04

जांच की सटीकता व शुद्धता बढ़ी 

इसको लेकर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता विपुल नंदन ने बताया कि भागलपुर में पीएचइडी के क्षेत्रीय जल जांच प्रयोगशाला को नेशनल अक्रेडटेशन बोर्ड फॉर, टेस्टिंग एंड कॉलीब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) से मान्यता मिला है. इसके साथ यह एनएबीएल से मान्यता प्राप्त ​​प्रयोगशाला हो गया है. यानी, जल जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने के साथ जांच की सटीकता व शुद्धता बढ़ गयी है. इंफ्रास्ट्रक्चर, मैनपावर एवं इक्यूपमेंट भी बढ़ा है. वहीं, हेल्प डेस्क तैयार किया गया.

अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने के बाद बदलाव

क्षेत्रीय जल जांच प्रयोगशाला को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने के बाद जांच की सटीकता व शुद्धता बढ़ गयी है. कई अत्याधुनिक एक्यूपमेंट लगाये गये हैं. तालाब की भी अब जांच इस प्रयोगशाला में होगी. आवश्यक उपकरण, ग्लावेयर, रसायन, समेत अन्य सामग्री के लिए अधिसूचना किया गया है. इसके मिलते ही सेंपलिंग शुरू करा दिया जायेगा.

ये बदलाव किये गए…

  • हेल्प डेस्क तैयार किया गया है

  • फायर बॉल लगा है, जो आग से बचाव करेगा.

  • फायर इक्स्टिंगग्विशर लगा है.

  • वॉल हंग रूम टेंप्रेचर लगाया गया है

  • रूम टेंप्रेचर भी लगा है.

  • पानी का सेंपल रखने की व्यवस्था की गयी है.

  • वाटर प्यूरीफाइ लगा है.

  • वाटर बाथ, हॉल प्लेट लगा है.

  • हॉल एयर रूम तैयार किया गया है.

  • आइ शॉवर लगा है यानी, जांच के दौरान आंख में कैमिकल जाने पर उपयोग किया जा सके.

  • आइऑन मीटर भी लगा है.

  • अत्याधुनिक प्यूम हूड मशीन लगा है

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