नहीं बदली मौना महादलित बस्ती की किस्मत

Updated at : 17 Dec 2015 12:49 AM (IST)
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नहीं बदली मौना महादलित बस्ती की किस्मत

पटेढ़ी बेलसर : आजादी के 69 साल बीतने के बाद भी प्रखंड की मनोरा एवं चकगुलामुद्दीन पंचायत के मौना तथा उफरौल महादलित बस्ती के लोगों के जीवन में कोई सुधार नहीं हुआ. सड़क के दोनों किनारे बसी इस बस्ती में तकरीबन दो सौ परिवार निवास करते हैं, जो मजदूरी के सहारे अपना जीवन यापन करते […]

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पटेढ़ी बेलसर : आजादी के 69 साल बीतने के बाद भी प्रखंड की मनोरा एवं चकगुलामुद्दीन पंचायत के मौना तथा उफरौल महादलित बस्ती के लोगों के जीवन में कोई सुधार नहीं हुआ. सड़क के दोनों किनारे बसी इस बस्ती में तकरीबन दो सौ परिवार निवास करते हैं, जो मजदूरी के सहारे अपना जीवन यापन करते हैं.

जिस दिन मजदूरी की चूल्हा जला, नहीं तो भूखे पेट सोना पड़ता है. विकास के नाम पर पक्की सड़क तो बन गयी, लेकिन इन परिवारों को आज तक पक्का मकान नसीब नहीं हुआ. करीब 24 वर्षों से बसे महादलित परिवार के मुसहर जाति के लोग आज भी विस्थापितों जैसी जिंदगी जी रहे हैं.

इस बस्ती में शिक्षा का घोर अभाव है. पूरे टोले में एक मैट्रिक पास तथा दूसरा नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है. वैशाली जिले का यह दलित बस्ती सरकार के विकास का दावा को खोखला साबित कर रही है. फूस के इन घरों में कहीं-कहीं बिजली के एक बल्ब जरूर दिखाई देते हैं.

पूरे टोले में एक भी शौचालय नहीं : महादलितों की यह बस्ती स्वच्छ भारत अभियान को मुंह चिढ़ाती प्रतीत हो रही है. चारों ओर गंदगी का अंबार है और पूरे बस्ती में एक भी शौचालय नहीं है. न तो सार्वजनिक और न व्यक्तिगत. लोग खुले में शौच करने के लिए विवश हैं. शिक्षा और सुविधा के अभाव में यहां लोग गंदगी में ही रहने को विवश हैं.
भूमिहीन परिवारों को सरकार द्वारा जमीन खरीद कर दी गयी : इस महादलित टोले के सभी परिवार भूमिहीन हैं. 200 परिवार वाले इस टोले में सरकार द्वारा 59 परिवारों को जमीन खरीद कर दी गयी, लेकिन सरकार द्वारा दी गयी जमीन इतनी गहरी है कि उसमें मकान नहीं बनाया जा सकता. ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा दी गयी भूमि बेकार पड़ी है, अगर उसमें मिट्टी भराई करा दे ,तो मकान बनाया जा सकता है.
अधिकतर परिवारों को इंदिरा आवास योजना का लाभ मिला : सड़क के दोनों किनारे बसा यह टोला दो पंचायतों में विभक्त है. दोनों पंचायतों से इंदिरा आवास का लाभ अधिकतर परिवारों को दिया जा चुका है. लाभुक प्रथम किस्त की राशि भी ले चुके हैं, लेकिन जो जमीन मिली है उसमें मिट्टी भराने में ही वह राशि समाप्त हो जायेगी.
इसलिए अधिकतर परिवारों ने अब तक आवास का निर्माण नहीं कराया है. यदि राशि देने के पूर्व जमीन को मकान बनाने के योग्य बना दिया जाता, तो आवास के लिए प्राप्त राशि का सदुपयोग होता.
शिक्षा की व्यवस्था के बावजूद बच्चे पढ़ने नहीं जाते : जागरूकता के अभाव में इस बस्ती के बगल में आंगनबाड़ी केंद्र तथा उत्क्रमित मध्य विद्यालय उफरौल होने के बावजूद इस टोले के बच्चे वहां नहीं जाते हैं. केवल कुछ बच्चे ही विद्यालय जा पाते हैं. यदि टोले में जागरूकता अभियान चला कर बच्चों एवं अभिभावकों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया जाता तो शायद विद्यालय में बच्चों का प्रवेश बढ़ता.
केवल एक युवक मुकेश मांझी मैट्रिक पास है तथा एक छात्रा कबूतरी कुमारी 9 वीं कक्षा में पढ़ रही है. कबूतरी के पिता बिनोद मांझी को अपनी पुत्री पर गर्व है. बिनोद मांझी कहते हैं कि बाकी बच्चे भी शिक्षित हों, इसके लिए सरकार कदम उठाये.
बस्ती में नशापान है बड़ा मुद्दा : महादलित परिवारों की इस बस्ती के अधिकतर लोग नशे के शिकार हैं, जिस कारण ये अपनी आमदनी का अधिकतर हिस्सा नशापान पर व्यय कर देते हैं.
महादलितों के उत्थान के लिए सरकार कई प्रकार की योजनाएं चला रही है. लेकिन इस बस्ती में वह योजनाएं धरातल पर नहीं दिखतीं. नशापान का असर न केवल उनके विकास पर पड़ रहा हैं बल्कि उनके रहन-सहन और बच्चों की शिक्षा-दिक्षा भी प्रभावित हो रही है.
नहीं मिल रहा मनरेगा योजना का लाभ: सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा यहां टांय-टांय फिस साबित हो रही है. मुख्यत: मजदूरी के सहारे जीवन यापन करने वाले महादलितों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध नहीं होने के कारण ये लोग रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं.
क्या कहते हैं पंचायत के प्रतिनिधि
सरकार की ओर से कुछ महादलित परिवारों को आवास भूमि उपलब्ध करायी गयी है और शेष लोगों दी जानी है.सरकार को चाहिए कि बचे हुए भूमिहीनों को ऊंची जगहों पर जमीन उपलब्ध कराये, ताकि उसमें घर बना कर वे रह सकें.
अजय पासवान , मुखिया, चकगुलामुद्दीन पंचायत
59 परिवारों को सरकार द्वारा क्रय कर जमीन दी गयी है, लेकिन वह चौर किनारे होने के कारण जमीन काफी नीचे है. जल जमाव मुख्य समस्या है. उसमें बिना मिट्टा भराये मकान निर्माण नहीं कराया जा सकता है. सरकार को चाहिए कि उस जमीन को आवास योग्य बनवा दे, ताकि गरीब महादलित परिवार उसमें आवास बना सकें.
तन्नु देवी , मुखिया, मनोरा पंचायत
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