गोदाम से मिले 1473 बोरा चावल व गेहूं सील

गोरौल : नारायणपुर बेदौलिया गांव स्थित एक थोक गल्ला व्यवसायी के गोदामों पर छापेमारी कर अवैध रूप से रखे गये 1473 बोरा चावल और गेहूं बरामद किये गये. अचानक की गयी इस छापेमारी से अवैध खाद्यान्न व्यवसायियों में हड़कंप मच गया है. अवैध धंधेबाजों द्वारा रखे गये कालाबाजारी के लिए खाद्यान को सुरक्षित स्थान पर […]
गोरौल : नारायणपुर बेदौलिया गांव स्थित एक थोक गल्ला व्यवसायी के गोदामों पर छापेमारी कर अवैध रूप से रखे गये 1473 बोरा चावल और गेहूं बरामद किये गये. अचानक की गयी इस छापेमारी से अवैध खाद्यान्न व्यवसायियों में हड़कंप मच गया है. अवैध धंधेबाजों द्वारा रखे गये कालाबाजारी के लिए खाद्यान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में लगे हैं.
मालूम हो कि गुप्त सूचना के आधार पर अनुमंडलाधिकारी मुमताज आलम, एसडीपीओ महुआ अनंत कुमार राय, एडीएसओ शैलेंद्र शर्मा ,बीडीओ शशि प्रिय वर्मा, सीओ अनील कुमार ,थानाध्यक्ष दिलीप कुमार की टीम द्वारा धावा बोल कर बख्तौरगंज गांव निवासी विजय साह के लगभग आधा दर्जन गोदामों पर छापेमारी कर चावल 1042 बोरा एवं गेहूं 431 बोरा बरामद किया गया है.
बताया गया है कि सभी अनाज भारतीय खाद्यान्न निगम द्वारा पैकिंग किया गया था , जो जन वितरण प्रणाली के दुकान के माध्यम से आम जनता को सस्ती दर पर वितरित किया जाना था. प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से पूछे जाने पर बताया गया कि सभी जब्त खाद्यान्न को बिहार खाद्यान्न निगम के गोदाम प्रबंधक के जिम्मेवारी पर दिया गया है.
सवाल यह उठता है कि बार-बार इतने बड़े पैमाने पर जन वितरण प्रणाली के खाद्यान्न को कालाबाजारियों के चंगुल से जब्त किया जाता है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ प्राथमिकी दर्ज करायी जाती है. लेकिन अभी भी अवैध धंधेबाज कानून की गिरफ्तार से कोसों दूर हैं. अगर इसी तहर से लगातार छापेमारी कर खाद्यान्न को पकड़ा जाये तो ही इसके अवैध धंधेबाजों पर लगाम लग सकती है.
इतना ही नहीं बीते माह प्रखंड क्षेत्र के रसुलपुर गोरी गांव में भी बड़े पैमाने पर छापेमारी कर अवैध खाद्यान्न को बरामद किया गया था और अवैध धंधेबाज पर प्राथमिकी दर्ज करा कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. ये धंधेबाज अभी भी खाद्यान्न के कालाबाजारी धड़ल्ले से कर रहे हैं. गोरौल बाजार एवं इसके आसपास के क्षेत्र इन धंधेबाजों के लिए सेफ जोन साबित हो रहा है. यहां एफसीआइ के बोरे से दूसरे बोरे में खाद्यान्न भर कर कई जिलों में भेजा जाता है.
सूत्र बताते हैं कि उक्त चावल को पॉलिस भी मशीन द्वारा करा दिया जाता है, जिससे चावल का रंग बदल जाता है. लोगों का कहना है कि आपूर्ति विभाग के मिली भगत से ही यह धंधा फल फुल रहा है. थानाध्यक्ष दिलीप कुमार ने बताया कि आपूर्ति विभाग द्वारा इस संबंध में कोई लिखित आवेदन अभी तक नहीं दिया गया है.
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