रात में गायब रहते हैं डॉक्टर व कर्मी
Updated at : 11 Dec 2015 1:24 AM (IST)
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हाजीपुर : जिले के सदर अस्पताल में भरती मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है. अस्पताल के सर्जिकल,जेनरल एवं महिला वार्ड में भरती मरीजों की दशा देख कर ऐसा लगता है, जैसे उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया हो. उचित देखभाल के अभाव में भरती मरीजों का इलाज सही ढंग से नहीं हो […]
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हाजीपुर : जिले के सदर अस्पताल में भरती मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है. अस्पताल के सर्जिकल,जेनरल एवं महिला वार्ड में भरती मरीजों की दशा देख कर ऐसा लगता है, जैसे उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया हो. उचित देखभाल के अभाव में भरती मरीजों का इलाज सही ढंग से नहीं हो पा रहा.
कई मरीजों के परिजनों ने शिकायत की कि वार्ड में न तो डॉक्टर नियमित रूप से आते हैं न कोई स्टाफ उपलब्ध रहता है. ऐसी स्थिति में मरीज से संबंधित कोई भी परामर्श लेने के लिए भटकना पड़ता है.
केवल दिन में ही नजर आती हैं नर्स : अस्पताल के इन वार्डों में दिन में सुबह से शाम तक तो नर्स दिखाई पड़ती हैं, लेकिन शाम के बाद फिर अगली सुबह तक रोगियों की सुध लेने वाला कोई नहीं मिलता. वार्ड में भरती मरीज एक सूई लगाने के लिए भी नर्स की ओर टकटकी लगाये रहते हैं.
इन मरीजों को समय पर न तो सूई-दवा मिल पाती है न इनकी देखरेख होती है. अस्पताल में न तो कोई वार्ड अटेंडेंट न ही वार्ड ब्यॉय, शाम के बाद नर्सें भी नदारद, ऐसे में मरीजों की देखभाल हो, तो कैसे. नर्सों की ड्यूटी सुबह 8 से रात 8 बजे तक ही है. इसमें भी लापरवाही देखी जाती है. मरीज बताते हैं कि ये नर्सें सुबह 10 बजे के पहले नहीं आतीं और शाम 6-7 बजते ही ड्यूटी रूम का ताला बंद कर चली जाती हैं. इस बीच वार्ड में भरती किये जाने वाले मरीजों के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है कि उनकी देखरेख कौन करे.
इमरजेंसी का भी है बुरा हाल : सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भी मरीजों के इलाज की व्यवस्था में सुधार नहीं आ रहा. इमरजेंसी वार्ड में भरती मरीजों की देखभाल के लिए आठ एएनएम को तैनात करने की मांग की गयी थी. लगभग ढाई साल पहले ही अस्पताल प्रबंधक ने इसकी आवश्यकता बताते हुए तत्कालीन सिविल सर्जन से इमरजेंसी में नर्सों की ड्यूटी लगाने का अनुरोध किया था. यह आज तक नहीं हो पाया.
इसका नतीजा है कि इमरजेंसी वार्ड में भरती मरीजों को सूई,स्लाइन एवं अन्य उपचार के लिए वहां नाजायज ढंग से काम कर रहे कुछ नौसिखिये लड़कों पर निर्भर रहना पड़ता है. सदर अस्पताल के कर्मी भी यह स्वीकार करते हैं कि इमरजेंसी में जब तक एक फिजिशियन, एक सर्जन और ए ग्रेड नर्स समेत आठ एएनएम की तैनाती नहीं होती, तब तक मरीजों के इलाज की व्यवस्था नहीं सुधरने वाली. लंबे समय से महज एक चिकित्सक के भरोसे चल रहा है इमरजेंसी वार्ड.
आउट डोर में इलाज की खानापूरी : सदर अस्पताल के आउट डोर में हर दिन मरीजों की भीड़ जुटती है. यहां बड़ी संख्या में मरीज तो आ रहे हैं, लेकिन उन मरीजों के इलाज के प्रति चिकित्सक गंभीर नहीं दिखते. रोगियों की शिकायत है कि डॉक्टर उनकी तकलीफ भी ठीक से नहीं सुनते. एक मरीज पर दो मिनट भी नहीं देते हैं चिकित्सक. आउटडोर में कई विभागों के चिकित्सक अपनी ड्यूटी में अक्सर लेट पाये जाते हैं. चिकित्सक के इंतजार में मरीज घंटों कतार में खड़े रहते हैं. ओपीडी की दूसरी पाली में तो कुछ को छोड़ कर ज्यादातर चिकित्सक विलंब से ही पहुंचते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
सदर अस्पताल में मरीजों का इलाज सही तरीके से हो रहा है. सभी चिकित्सकों को समय का पालन करने को कहा गया है. मरीजों की सुविधा के लिए आधारभूत संरचना का विस्तार हो रहा है. मैन पावर की कमी दूर करने के लिए विभाग को लिखा जा रहा है.
डाॅ इंद्रदेव रंजन, सिविल सर्जन
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