दवा दुकानें बंद, मरीजों की जान पर आफत

Updated at : 06 Dec 2015 2:04 AM (IST)
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दवा दुकानें बंद, मरीजों की जान पर आफत

हाजीपुर : जिला मुख्यालय में स्थित दवा दुकानदारों के रवैये से आम लोगों में न केवल आक्रोश घर कर रहा है बल्कि संशय भी बन रही है. पिछले चार दिनों से शहर की अधिकतर दवा दुकान अघोषित रूप से बंद हैं, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. दवा दुकानदारों […]

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हाजीपुर : जिला मुख्यालय में स्थित दवा दुकानदारों के रवैये से आम लोगों में न केवल आक्रोश घर कर रहा है बल्कि संशय भी बन रही है. पिछले चार दिनों से शहर की अधिकतर दवा दुकान अघोषित रूप से बंद हैं, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

दवा दुकानदारों के इस रवैये से कई लोगों का जीवन भी संकट में पड़ा हुआ है. समाज के कई बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक संगठनों ने दवा दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है.

क्या है मामला : राज्य सरकार के आदेश पर जिला स्वास्थ्य प्रशासन जिले की दवा दुकानों की जांच-पड़ताल पिछले चार दिनों से कर रहा है. दुकानदार जांच दल के भय से दुकान का सटर गिरा कर फरार हैं. दवा की खोज में लोग दर-दर भटक रहे हैं. अपने बीमार परिजनों के लिए दवा की खोज में भटक रहे लोग पटना से दवा मंगाने को विवश हैं.
दवा दुकानों पर उठ रही उंगली : जांच से घबरा कर दुकान बंद कर दिये जाने से आम लोग अब दवा दुकानों पर उंगली उठाने लगे हैं. यह खुलेआम कहने लगे हैं कि यदि दुकान में सही दवा बिक रही है, तब दुकान बंद करने का कोई कारण नहीं है. अब तक जिन दुकानों की भी जांच की गयी, उनमें नकली दवा मिली और उन्हें प्रतिबंधित किया गया. जांच दल द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार कई दुकानों में प्रतिबंधित एवं एक्सपायर्ड दवा पायी गयी हैं,
जो दवा दुकानदारों का आम लोगों के प्रति रवैये को दरसाता है. दवा दुकानों के बंद रहने पर आम लोग लोग अब कहने लगे हैं कि अधिकतर दुकानें शायद नकली दवा बेचती हैं, इसलिए अपनी दुकान बंद की है.
जीवन से खेल रहे दवा दुकानदार : जीवन रक्षा के लिए हम जिस दवा को खा रहे हैं वह कहीं हमारी जान के लिए खतरा न हो ऐसा आम लोगों का मानना है.
सदर अस्पताल रोड में दवा खोज रहे कई लोगों ने आरोप लगाया कि जांच के भय से दुकान बंद रखनेवाले दुकानदार आम लोगों को नकली दवा बेच कर उनके जीवन को खतरे में डाल रहे हैं. यदि सही दवा बेच रहे, तब जांच से नहीं डरना चाहिए.
अधिकतर दुकानों पर नहीं रहते फार्मासिस्ट : दवा की बिक्री के लिए सरकार ने फार्मासिस्ट की डिग्री को अनिवार्य माना है. हर दुकानदार दुकान की अनुज्ञप्ति लेने के समय किसी-न-किसी फार्मासिस्ट का प्रमाणपत्र भी लगाता है, लेकिन कुकुरमुत्ते की तरह फैली दवा दुकानों में से शायद ही किसी दुकान पर फार्मासिस्ट रहता है. फलत: आम लोगों को दवा दुकानदार की अनभिज्ञता की भी क्षति उठानी पड़ती है.
दुकानें बंद रखना अनुज्ञप्ति का उल्लंघन : दवा दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानें बंद रखना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि अनुज्ञप्ति की शर्तों का भी उल्लंघन है.
दवा दुकानदार रात्रि में अपनी दुकानें बंद रखते हैं और रात्रि में दवा खरीदने के लिए लोगों को अतिरिक्त राशि का व्यय करना पड़ता है, जो कानूनन गलत है और अनुज्ञप्ति की शर्तों का भी उल्लंघन है.
क्या कहते हैं लोग
ऐसी दुकान जो जांच के भय से बंद पायी जाये उसकी अनुज्ञप्ति रद्द कर दी जाये और नकली दवा बेचनेवालों के विरुद्ध हत्या की सोची-समझी साजिश रचने का मामला दर्ज किया जाये. दवा दुकानों की नियमित जांच हो और नकली कंपनी की दवा लिखनेवाले चिकित्सकों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाये.
शशि मोहन प्रसाद सिंह
प्रगतिशील अधिवक्ता मंच
दवा के नाम पर जहर के कारोबार को जड़ से समाप्त करने के लिए नकली दवा के विरुद्ध जांच अभियान को लगातार चलाया जाये और दोषी दुकानदार के साथ ही वैसे चिकित्सकों को भी जांच के दायरे में लाया जाये.
संजय कुमार, सदस्य, संत दुर्गा फाउंडेशन
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