वैशाली : च्यवन ऋषि, कश्यप ऋषि, विश्वामित्र समेत कई ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है हरिहरक्षेत्र
Updated at : 27 Nov 2018 9:23 AM (IST)
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हाजीपुर (वैशाली) : हरिहर क्षेत्र का स्थान भारत के धर्म क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. कार्तिक पूर्णिमा पर यहां एक माह से अधिक दिनों तक लगने वाला मेला देश-दुनिया के लोगों को आकर्षित करता है. वैदिक काल के अनेक पुराणों और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में हरिहर क्षेत्र की विस्तृत चर्चा मिलती है. बताते […]
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हाजीपुर (वैशाली) : हरिहर क्षेत्र का स्थान भारत के धर्म क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. कार्तिक पूर्णिमा पर यहां एक माह से अधिक दिनों तक लगने वाला मेला देश-दुनिया के लोगों को आकर्षित करता है. वैदिक काल के अनेक पुराणों और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में हरिहर क्षेत्र की विस्तृत चर्चा मिलती है. बताते हैं कि सतयुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जनकपुर में आयोजित धनुष यज्ञ में शामिल होने के दौरान हरिहर क्षेत्र में आकर भगवान हरि की पूजा-अर्चना की थी.
हाजीपुर के रामभद्र रामचौरा में आज भी उनके चरण चिह्न मौजूद हैं, जहां हर साल रामनवमी को भव्य मेला लगता है. च्यवन ऋषि, कश्यप ऋषि, विश्वामित्र, जड़भरत समेत अनेक ऋषि-मुनियों ने इस महाक्षेत्र को तपो भूमि बनाया था. बौद्ध साहित्य से पता चलता है कि भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ यहां पधार कर अपने दिव्य संदेशों से क्षेत्र को प्रकाशमान किया था. कहा जाता है कि औरंगजेब के कारागृह से मुक्त होने पर छत्रपति शिवाजी महाराज हरिहर क्षेत्र मेले में पधारे थे.
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