चेहराकलां : तमिलनाडु में बंधक बने छह मजदूर लौटे
Updated at : 24 Jul 2018 9:27 AM (IST)
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प्रवासी मजदूरों ने चंदा वसूल कर की सहायता चेहराकलां : तमिलनाडु में बंधक बनाये गये 30 मजदूरों में छह मजदूर सोमवार को अपने पैतृक गांव लौट गये. हालांकि अन्य मजदूरों का अभी भी कोई सुराग नहीं मिला है. एक तरफ जो मजदूर लौट गये उनके परिजनों में खुशी है तो दूसरी तरफ जिन मजदूरों का […]
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प्रवासी मजदूरों ने चंदा वसूल कर की सहायता
चेहराकलां : तमिलनाडु में बंधक बनाये गये 30 मजदूरों में छह मजदूर सोमवार को अपने पैतृक गांव लौट गये. हालांकि अन्य मजदूरों का अभी भी कोई सुराग नहीं मिला है. एक तरफ जो मजदूर लौट गये उनके परिजनों में खुशी है तो दूसरी तरफ जिन मजदूरों का एक सप्ताह बाद भी सुराग नहीं मिला उनके परिजन किसी अप्रिय घटना की आशंका को लेकर सशंकित व परेशान हैं.
सोमवार को वापस लौटने वाले छह मजदूरों में कटहरा ओपी क्षेत्र के रसुलपुर फतह गांव निवासी शंकर साह और उदय साह, बखरीदोआ गांव निवासी पवन सहनी, देवलाल सहनी, रणवीर सहनी और राकेश कुमार उर्फ राजा शामिल हैं. सभी सकुशल वापस घर लौटे हैं. इनके घर पहुंचते ही परिवार में खुशी और उल्लास का माहौल है . वहीं अन्य मजदूरों के परिजन सशंकित है.
चकमा देकर बंधक से हुए मुक्त
घर वापस लौटने वाले मजदूरों ने बताया कि बंधक बनाये जाने के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा उनलोगों को किसी प्रकार की सहायता नहीं की गयी. कंपनी के कर्मियों व बिचौलिये को चकमा देकर वे लोग उनके चंगुल से बाहर निकले हैं. उनलोगों के पास ट्रेन के टिकट का पैसा नहीं था, जिससे वे लोग घर लौट पाते. सेमल क्षेत्र में रह रहे बिहार के लोगों ने उनलोगों की मजबूरी को सुना.
बिहारी प्रवासी के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर उनलोगों को ट्रेन का टिकट और रास्ते में खाने-पीने लायक रुपये मुहैया कराया. इसके बाद उनलोगों को राहत मिली और छह मजदूर अपने परिजनों के पास सुरक्षित है. वापस लौटने वाले मजदूरों की माने तो शेष मजदूरों को कंपनी के लोग अभी भी बंधक बनाकर रखे हुये है. स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण इस प्रकार की घटना घटी है. उनलोगों को भी बंधक से मुक्त कराने में प्रशासन ने कोई पहल नहीं की है.
17 जुलाई को सेलम जंक्शन पर बनाये गये थे बंधक
मालूम हो कि बीते 13 जुलाई को कटहरा ओपी क्षेत्र से सोलह सहित कुल 30 मजदूर तमिलनाडु के लिये घर से गये थे.चार दिन बाद 17 जुलाई को सेलम जंक्शन पर पहुंचने पर कंपनी के कर्मचारियों ने उनलोगों को कंपनी के वाहन में बैठाकर ले गये थे. एक सुनसान स्थान पर ले जाकर सभी मजदूरों को बंधक बना लिया गया था. बंधक बनाए गये मजदूरों को छोड़ने के एवज में 15 लाख रुपये फिरौती की मांग की गयी थी.
फिरौती नहीं देने पर सभी मजदूरों की हत्या किये जाने की चेतावनी दी गयी थी. इसके बाद जिला प्रशासन से लेकर श्रम विभाग के पदाधिकारियों में खलबली मच गयी थी. श्रम आयुक्त से लेकर मुख्यमंत्री ने बंधक बनाये गये मजदूरों को सकुशल वापस कराने का आश्वासन दिया था. सरकार के प्रधान सचिव ने मजदूरों को मुक्त कराये जाने का दावा किया था.
क्या कहते हैं वापस लौटे मजदूर
सेलम जंक्शन पर उतरने के बाद तक उनलोगों को इसका आभास नहीं हुआ था कि वे लोग किसी साजिश के शिकार होने जा रहे है. जब उसे एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया गया तब उसे लगा कि कंपनी के लोग उनलोगों को बंधक बना लिया है.
शंकर साह, रसुलपुर फतह
स्थानीय प्रशासन द्वारा बंधक बनाये गये मजदूरों को रिहा कराने के लिये कोई पहल नहीं की गयी. यहां तक की जब छह लोग वहां से किसी तरह निकलकर बाहर आये तब भी स्थानीय पुलिस ने उनलोगों के प्रति लापरवाही की. हमलोग बिहारी प्रवासी मजदूरों द्वारा चंदा से संग्रह की गयी आर्थिक सहायता से घर पहुंचे हैं. हमलोग बंधक बनाने वालों को चकमा देकर मुक्त हुये हैं.
उदय साह, रसुलपुर फतह
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