बिहार : वैशाली को ताड़ उत्पादों का हब बनाने की चल रही है तैयारी

Updated at : 26 Jun 2017 9:30 PM (IST)
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बिहार : वैशाली को ताड़ उत्पादों का हब बनाने की चल रही है तैयारी

वैशाली : शराबबंदी के बाद जहां बिहार की सरकार ने नीरा को ब्रांड बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिये हैं, वहीं वैशाली के जिला उद्योग केंद्र की योजना जिला को ताड़ के विभिन्न उत्पादों का हब बनाने की है. नीरा परियोजना के तहत नीरा, ताड़ का गुड़ और पेड़ा आदि के उत्पादन की […]

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वैशाली : शराबबंदी के बाद जहां बिहार की सरकार ने नीरा को ब्रांड बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिये हैं, वहीं वैशाली के जिला उद्योग केंद्र की योजना जिला को ताड़ के विभिन्न उत्पादों का हब बनाने की है. नीरा परियोजना के तहत नीरा, ताड़ का गुड़ और पेड़ा आदि के उत्पादन की दिशा में पहले से ही काम चल रहा है. सराय के निकट अकबर मलाही गांव के ताड़ की छड़ी वाले पारंपरिक उद्योग को भी एक कलस्टर इकाई के रूप में विकसित करने की योजना को अंजाम देने की कोशिश हो रही है. दयालपुर गाव में ताड़ के फल को डिब्बाबंद तरीके से तैयार करने और बेचने की दिशा में एक कंपनी काम कर रही है. इसके अलावा ताड़ के पंखे, चटाई, ताल मिश्री आदि उत्पादों की इकाइयां गठित कराने की भी योजना है, जिसमें जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक जुटे हुए हैं.

महाप्रबंधक सुनीत कुमार मिश्र कहते हैं कि भले ही कहावतों में ताड़ पेड़ को अनुपयोगी बताते हुए कहा गया हो कि बड़ा हुआ तो क्या हुआ… मगर असल में ताड़ का पेड़ काफी उपयोगी होता है. इसके हर हिस्से का काम होता है. ताड़ के रस से नीरा और गुड़ बनता है, इसी से ताल मिश्री भी तैयार होता है जिसका सेवन नवजात शिशुओं को कराया जाता है. इसका फल भी काफी स्वादिष्ट और सेहतमंद होता है. पत्तों से पंखा और चटाई बनता है, जो गरमी के मौसम में सुखदायक होता है. इसके तने से छड़ी बनती है, जो बुढ़ापे में काम आती है. संयोगवश इनमें से ज्यादातर चीजों का उत्पादन वैशाली जिले में पारंपरिक रूप से होते हुए आया है. इसलिए अब हम इस दिशा में काम कर रहे हैं कि इन्हें औपचारिक औद्योगिक उत्पादों में बदला जाये.

राज्य में नीरा परियोजना को अंजाम देने की प्रक्रिया में जिन चार केंद्रों को चुना गया है और काम चल रहा है उनमें से एक वैशाली जिला भी है. यहां के औद्योगिक क्षेत्र परिसर में नीरा परियोजना का काम चल रहा है और इससे नीरा पेय के साथ-साथ गुड़ और पेड़ा जैसे उत्पादों को तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है. इसके अलावा दयालपुर गांव में ताड़फल को डिब्बा बंद उत्पाद बना कर बेचने का काम सुमन वाटिका फूड प्रोडक्ट्स नामक कंपनी कर रही है.

भगवानपुर प्रखंड के अकबर मलाही गांव में कई दशकों से पारंपरिक रूप से ताड़ की छड़ी बनाने का काम चल रहा है. इस काम में वहां के 20 से अधिक परिवार जुड़े हैं और सौ से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी इससे चल रही है. जिला उद्योग केंद्र की योजना इस गांव को छड़ी उद्योग केंद्र के कलस्टर के रूप में विकसित करने की है. इसका डीपीआर बना कर स्वीकृति ले ली गयी है. हालांकि अभी इस काम में कई बाधाएं हैं. कॉमन सर्विस सेंटर के लिए जमीन की दरकार है जिसे देने के लिए कोई तैयार नहीं है. इसके अलावा सभी परिवारों का को-ऑपरेटिव के रूप में रजिस्ट्रेशन होना है. इन दोनों काम के न होने से काम अभी अटका हुआ है. इसके बावजूद वहां लगातार छड़ी बन रही है और देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जा रही है.

अब उद्योग केंद्र का जोर ताड़ के पत्तों से गुणवत्ता पूर्ण चटाई और पंखों को बनवा कर उसे ब्रांडेड प्रोडक्ट के रूप में बेचने की है. उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक कहते हैं कि अगर अवसर मिला तो हमलोग इसे भी पूरा करेंगे, ताकि वैशाली जिला सही अर्थों में ताड़ उत्पादों का हब बन सके.

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