बिहार के विश्वविद्यालय 5 सालों में खर्च नहीं कर पाये 3293 करोड़, शिक्षा विभाग की ऑडिट में हुआ खुलासा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Feb 2023 4:44 AM
बिहार के विश्वविद्यालयों ने इसके उपयोग न करने की कोई ठोस वजह भी नहीं बतायी है. शिक्षा विभाग ने ऑडिट रिपोर्ट में आयी विसंगतियों को सुधारने के लिए विश्वविद्यालयों को हाल ही में दिशा निर्देश भी जारी किये हैं.
राजदेव पांडेय, पटना: बिहार के विश्वविद्यालयों में वित्तीय प्रबंधन में जबरदस्त कमियां हैं, जिसके चलते करोड़ों की विकास राशि उसे सरेंडर करनी पड़ रही है. हालात यह हैं कि पिछले पांच सालों में बिहार के सभी परंपरागत विश्वविद्यालयों की आधारभूत संरचना और दूसरी सुविधाओं के लिए दी गयी बजटीय राशि में 3293.83 करोड़ का उपयोग नहीं हो सका है. विश्वविद्यालयों को यह राशि सरकार को सरेंडर करनी पड़ी है. यह राशि बिहार सरकार, यूजीसी और बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद की तरफ से मुहैया करायी गयी थी.
विश्वविद्यालयों के वित्तीय प्रबंधन के मैकेनिज्म में इस विसंगति का खुलासा हाल ही में शिक्षा विभाग को मुहैया करायी गयी एक विशेष ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में जयप्रकाश विश्वविद्यालय और टीएमबीयू ने क्रमश: 31.85 और 23.85 प्रतिशत अनुदानों का उपयोग नहीं किया गया है. हैरत की बात है कि इन विश्वविद्यालयों ने इसके उपयोग न करने की कोई ठोस वजह भी नहीं बतायी है. शिक्षा विभाग ने ऑडिट रिपोर्ट में आयी विसंगतियों को सुधारने के लिए विश्वविद्यालयों को हाल ही में दिशा निर्देश भी जारी किये हैं.
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर 2021-22 तक आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय सहित सभी पारंपरिक विश्वविद्यालयों को कुल 17835.08 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया. इसमें से 14541.25 करोड़ की राशि खर्च की गयी. शेष 3293.83 करोड़ की राशि सरकार को सरेंडर करनी पड़ी. पिछले पांच सालों में कुल बजट का 4.8 प्रतिशत से लेकर 34.45 प्रतिशत बजट सरेंडर की है. अगर सरेंडर की गयी राशि का बारीकी से विश्लेषण करें तो उजागर होता है कि वर्ष 2017-18 से 2021-22 औसतन कुल 18.47 प्रतिशत राशि सरेंडर की गयी है. रिपोर्ट के मुताबिक तीन हजार करोड़ से अधिक की राशि का उपयोग न करने से पता चलता है कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय प्रबंधन के मेकेनिज्म का अभाव है.
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वित्तीय वर्ष- बजट प्रावधान- खर्च – सरैंडर राशि
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2017-18 – 2998.73 -2852.15 -146.57
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2018-19 – 4497.13 -3495.63 -1001.50
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2019-20 – 3671.82 – 3172.41 -499.41
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2020-21 – 3061.39 – 2657.67 – 403.72
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2021-22 -3606.01 -2363.38 -1242.63
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(सभी राशियां करोड़ में )
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