जाम से लोग परेशान, चालान पर केंद्रित दिखती पुलिस व्यवस्था

परीक्षा के दौरान स्थिति और भी गंभीर
– ट्रैफिक थाना, पुलिस पिकेट और कार्रवाई के बावजूद नहीं सुलझी जाम की समस्या, परीक्षा के दौरान स्थिति और भी गंभीर सुपौल. जिला मुख्यालय में जाम अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर दिन के अधिकांश समय वाहन रेंगते नजर आते हैं. लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में तय समय से कई गुना अधिक समय लग जाता है. प्रशासन और नगर परिषद द्वारा कई बार अभियान चलाए जाने के बावजूद जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे आम लोगों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है. शहरवासियों का कहना है कि वर्ष 2023 में यातायात थाना की स्थापना से लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी. इसके साथ ही शहर के प्रमुख चौक जैसे स्टेशन चौक, महावीर चौक, लोहिया चौक और पटेल चौक पर पुलिस पिकेट का निर्माण भी किया गया. इन पिकेटों पर ट्रैफिक पुलिस की प्रतिनियुक्ति की गई, ताकि वाहनों का सुचारू संचालन हो सके. लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है. ट्रैफिक थाना और पिकेट बनने के बाद भी जाम बरकरार शहर में यातायात थाना और पुलिस पिकेट बनने के बाद शुरुआत में कुछ दिनों तक ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार देखा गया. प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस की सक्रियता के कारण लोगों को राहत मिली. लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था फिर से पुराने ढर्रे पर लौटती नजर आई. स्थानीय लोग बताते हैं कि यातायात थाना बनने के बाद लगा था कि अब जाम की समस्या खत्म हो जाएगी. लेकिन आज भी स्थिति पहले जैसी ही है. कई बार तो एम्बुलेंस तक जाम में फंस जाती है, जिससे मरीजों को परेशानी होती है. लोगों ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस की प्राथमिकता ट्रैफिक नियंत्रण से ज्यादा चालान काटने पर केंद्रित दिखती है. जब कोई बड़े अधिकारी की गाड़ी आती है तो तुरंत रास्ता साफ कर दिया जाता है. लेकिन आम लोगों के लिए घंटों जाम लगा रहता है. चालान लक्ष्य का दबाव, ट्रैफिक नियंत्रण प्रभावित होने का आरोप जानकारी के अनुसार ट्रैफिक पुलिस को विभाग की ओर से नियमित रूप से चालान काटने का लक्ष्य दिया जाता है. ऐसे में कई बार पुलिस कर्मी ट्रैफिक नियंत्रण से ज्यादा चालान काटने पर ध्यान केंद्रित करते नजर आते हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस अक्सर सड़कों के किनारे खड़े होकर वाहन चालकों के कागजात की जांच और चालान काटने में व्यस्त रहती है, जबकि चौक-चौराहों पर जाम की स्थिति बनी रहती है. जाम हटाने के बजाय पुलिस चालान काटने में ज्यादा समय देती है. अगर पुलिस सही तरीके से ट्रैफिक नियंत्रित करे तो जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े वाहन का चालान काटने में जुटी रहती है पुलिस इंटर और मैट्रिक परीक्षा के दौरान शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और भी अधिक प्रभावित हो जाती है. परीक्षा केंद्रों के आसपास बड़ी संख्या में अभिभावक और वाहन जमा हो जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इस दौरान ट्रैफिक पुलिस का ध्यान जाम हटाने से ज्यादा परीक्षा केंद्रों के आसपास खड़े वाहनों का चालान काटने पर केंद्रित रहता है. प्रशासन और नगर परिषद ने चलाए कई अभियान शहर में जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद सुपौल और प्रशासन द्वारा कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया. सड़कों के किनारे से अतिक्रमण हटाया गया और अवैध रूप से खड़े वाहनों पर कार्रवाई भी की गई. इसके अलावा बिहार पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान भी चलाया गया, जिसमें लोगों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की गई. लेकिन इन अभियानों का प्रभाव स्थायी रूप से नहीं दिख रहा है. जानकारों का मानना है कि जब तक ट्रैफिक प्रबंधन के लिए स्थायी और व्यवस्थित योजना नहीं बनाई जाएगी, तब तक जाम की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है. संरचनात्मक समस्याएं भी हैं जाम का कारण शहर में जाम की समस्या के पीछे कई संरचनात्मक कारण भी हैं. इनमें प्रमुख रूप से सड़कों की चौड़ाई कम होना, अनियंत्रित ऑटो और ई-रिक्शा संचालन, सड़क किनारे अवैध पार्किंग, अतिक्रमण, ट्रैफिक सिग्नल की कमी, पार्किंग की समुचित व्यवस्था का अभाव के कारण बाजार क्षेत्र में स्थिति ज्यादा गंभीर रहती है, जहां सड़कों के दोनों किनारों पर वाहन खड़े होने के कारण सड़क संकरी हो जाती है. व्यवस्था सुधार के लिए जरूरी ठोस कदम ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार शहर में जाम की समस्या से निपटने के लिए प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल की स्थापना, नो-पार्किंग जोन का सख्ती से पालन, नियमित ट्रैफिक मॉनिटरिंग, पार्किंग स्थल का निर्माण, अतिक्रमण पर स्थायी नियंत्रण, ट्रैफिक पुलिस की संख्या में वृद्धि जरूरी है. इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस को चालान के साथ-साथ ट्रैफिक नियंत्रण पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा. जाम की समस्या केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम लोगों को भी ट्रैफिक नियमों का पालन करना होगा. सड़क किनारे वाहन खड़ा करना, गलत दिशा में वाहन चलाना और बिना कारण सड़क पर वाहन रोकना भी जाम का बड़ा कारण है.
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