सुपौल में 150 साल पुराना वो चमत्कारी मंदिर, जहां नेपाल से भी माथा टेकने पहुंचते हैं श्रद्धालु

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 17 May 2026 7:10 AM

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Supaul Durga Mandir

Supaul Durga Mandir: कोसी किनारे बसा आस्था का धाम, मां के दरबार से खाली नहीं लौटता कोई भक्त

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Supaul Durga Mandir: प्रतापगंज (सुपौल) से सरोज कुमार महतो की रिपोर्ट. सुपौल जिले के चिलौनी उत्तर पंचायत स्थित तीनटोलीया बड़ी दुर्गा मंदिर आज सीमांचल इलाके में आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराने इस मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां के दरबार में अपनी मुराद लेकर आता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है. यही वजह है कि बिहार के कई जिलों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर की ख्याति लगातार बढ़ती जा रही है. खासकर दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. मंदिर परिसर भक्ति, आस्था और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरी तरह सराबोर हो जाता है.

फूस के घर से शुरू हुआ मंदिर का सफर

ग्रामीणों के मुताबिक इस मंदिर की स्थापना करीब 150 वर्ष पहले हुई थी. शुरुआती दिनों में माता की प्रतिमा फूस के बने छोटे से मंदिर में स्थापित की गई थी. बाद में टीन चदरा का निर्माण कराया गया और समय के साथ लोगों की आस्था बढ़ती गई. ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के सहयोग से बाद में भव्य पक्का मंदिर बनाया गया.

बताया जाता है कि जब मंदिर फूस का था, उस समय इसके बिल्कुल पास से कोसी नदी बहती थी. बावजूद इसके, बरसात और बाढ़ के दौरान भी मंदिर को कभी नुकसान नहीं पहुंचा. मंदिर परिसर के पास स्थित प्राचीन कदम का पेड़ आज भी उस दौर की याद दिलाता है और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

पीढ़ियों से चल रही पूजा की परंपरा

शुरुआती समय में ग्रामीण खुद मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे. बाद में स्वर्गीय हुलाय आचार्य के परिवार ने नियमित पूजा-पाठ की जिम्मेदारी संभाली. उनके बाद ठीठर आचार्य और वेदानंद आचार्य ने परंपरा को आगे बढ़ाया. वर्तमान में रोहित आचार्य पूरे विधि-विधान से मां की पूजा कर रहे हैं.

मंदिर समिति और ग्रामीणों ने कुछ वर्ष पहले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए करोड़ों रुपये की लागत से नए भव्य मंदिर का निर्माण कराया. आज यह मंदिर इलाके की धार्मिक पहचान बन चुका है.

दुर्गा पूजा में उमड़ता है आस्था का सैलाब

दुर्गा पूजा के दौरान यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है. सप्तमी से लेकर नवमी तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रहती है. दशहरा के मौके पर प्रसाद चढ़ाने और माता का आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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