रेलवे की जमीन से हटायी गयी दुकानें, झोपड़ियां भी टूटी

Published by :RAJEEV KUMAR JHA
Published at :15 Apr 2026 6:26 PM (IST)
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रेलवे की जमीन से हटायी गयी दुकानें, झोपड़ियां भी टूटी

सैकड़ों फुटकर दुकानदारों की रोजी-रोटी पर भी चला बुलडोजर

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– 25 वर्षों से बसे लोगों का टूट गया सपना – सैकड़ों फुटकर दुकानदारों की रोजी-रोटी पर भी चला बुलडोजर सुपौल. जिला मुख्यालय स्थित रेलवे की जमीन पर बुधवार को अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए गए अभियान ने कई परिवारों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया. सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई में रेलवे प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर करीब छह दर्जन से अधिक आवासीय घरों को ध्वस्त कर दिया. इसके साथ ही सड़क किनारे अस्थायी रूप से दुकान लगाकर जीवनयापन कर रहे सैकड़ों फुटकर विक्रेताओं को भी हटाया गया. अभियान के पहले दिन यह कार्रवाई इंजीनियरिंग कॉलेज के समीप से लेकर सार्वजनिक मेला समिति मैदान तक चलायी गई. प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. कई परिवार अपने घरों से सामान निकालते नजर आए, तो कई लोग अपनी आंखों के सामने अपने आशियाने को टूटते देख बेबस खड़े रहे. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान रेलवे की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पूर्व निर्धारित योजना के तहत की जा रही है और आगे भी जारी रहेगी. अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के लिए पहले ही नोटिस जारी किया गया था. हालांकि स्थानीय लोगों की पीड़ा इस कार्रवाई के दौरान साफ झलक रही थी. कई लोगों ने बताया कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से अधिक समय से यहां रह रहे थे और धीरे-धीरे अपनी मेहनत से घर बनाकर जीवन बसा लिया था. अचानक हुई इस कार्रवाई ने उनके सिर से छत छीन ली. एक महिला ने कहा हम लोग वर्षों से यहां रह रहे थे, यहीं बच्चों का पालन-पोषण किया. अब अचानक सब कुछ खत्म हो गया, समझ नहीं आ रहा कि कहां जाएं. वहीं एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि उनके पास अब रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है और वे खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं. इस कार्रवाई का असर केवल आवासीय परिवारों तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि सैकड़ों फुटकर दुकानदारों की रोजी-रोटी पर भी इसका सीधा असर पड़ा. सड़क किनारे छोटे-छोटे ठेले और दुकान लगाकर जीवनयापन करने वाले लोग अब बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे हैं. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास की मांग की है. उनका कहना है कि अगर अतिक्रमण हटाना जरूरी था, तो पहले उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी. बिना किसी ठोस इंतजाम के इस तरह की कार्रवाई ने उन्हें सड़क पर ला खड़ा किया है. इस दौरान पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो. हालांकि, लोगों में आक्रोश और मायूसी साफ देखी गई. रेलवे का यह अभियान भले ही जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से चलाया जा रहा हो, लेकिन इसके सामाजिक प्रभाव ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है.

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