शारदा सिन्हा को मिलेगा मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान, हुलास में उत्सवी माहौल

उनके पैतृक गांव हुलास में ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी जताई
राघोपुर. भारतीय लोकसंगीत की महान साधिका एवं स्वर कोकिला शारदा सिन्हा को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा के साथ ही पूरे राघोपुर प्रखंड सहित जिले में हर्ष का वातावरण है. विशेषकर उनके पैतृक गांव हुलास में ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी जताई. शारदा सिन्हा को यह सम्मान उनके अद्वितीय सांगीतिक योगदान, विशेष रूप से लोकगीतों छठ गीत, सोहर, कजरी, विवाह गीत आदि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए दिया गया है. उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक पहचान को पूरे देश में सम्मान दिलाया. पद्म विभूषण की घोषणा के बाद से ही हुलास गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया है. गांव के चौक-चौराहों पर लोग चर्चा करते देखे गए. ग्रामीणों ने बताया कि यह सिर्फ एक व्यक्ति को मिला सम्मान नहीं, बल्कि पूरी मिट्टी और उसकी लोकपरंपरा को मिला सम्मान है. गांव वासियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मांग किया है कि राघोपुर से हुलास गांव तक जाने वाली मुख्य सड़क का नाम “स्वर कोकिला शारदा सिन्हा मार्ग ” रखा जाए, ताकि आने वाली पीढियां उनके योगदान को याद रख सकें. इस संबंध में स्थानीय लोगों ने कहा कि शारदा दीदी ने अपने कंठ और साधना से इस क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है. हम सभी की मांग है कि जिस मार्ग से होकर वे बचपन में अपने गांव आती-जाती थीं, उसका नामकरण उनके नाम पर हो. यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि हुलास गांव को “सांस्कृतिक ग्राम” घोषित किया जाए और यहां एक सांस्कृतिक केंद्र या स्मृति भवन की स्थापना की जाए. जहां शारदा सिन्हा से जुड़ी स्मृतियां संरक्षित की जा सकें.
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