सरायगढ़ में कोशी के बढ़ते जलस्तर से तटबंध के भीतर दहशत: 1.73 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज की संभावना

सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर जाते | Prabhat Khabar Network
Kosi River Water Level: कोशी नदी के बढ़ते जलस्तर ने सरायगढ़ प्रखंड में दहशत फैला दी है. 1.73 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की संभावना के चलते तटबंध के अंदरूनी इलाकों में पानी फैलने लगा है. ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं.
Kosi River Water Level: बुधवार की सुबह 08 बजे तक कोशी बराज से करीब 1,73,555 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की संभावना जताई गई है, जिसके चलते तटबंध के अंदरूनी इलाकों में पानी फैलना शुरू हो गया है. नदी के इस बढ़ते आक्रामक रुख को देखते हुए सरायगढ़ प्रखंड की पांच संवेदनशील पंचायतों के ग्रामीण सहमे हुए हैं और एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करने की तैयारी में जुट गए हैं. मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है.
मवेशियों के चारे और आजीविका पर संकट
तटबंध के भीतर रहने वाले परिवारों के सामने एक बार फिर विस्थापन का दर्द उभरने लगा है:
- घर छोड़ने की मजबूरी: दियारा क्षेत्र के अधिकांश परिवार पूरी तरह खेती-किसानी और पशुपालन पर निर्भर हैं. बाढ़ का पानी खेतों में घुसने से उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है.
- चारे की किल्लत: ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ आने पर सबसे बड़ी समस्या मवेशियों को सुरक्षित रखने और उनके लिए हरे चारे के प्रबंध की होती है, क्योंकि सभी प्रमुख चारागाह और ऊंचे मैदान जलमग्न हो जाते हैं.
इन 5 पंचायतों के गांवों में फैला पानी
सरायगढ़ प्रखंड की भौगोलिक स्थिति के कारण कई पंचायतें सीधे तौर पर कोशी की जद में हैं:
- पूर्णतः प्रभावित क्षेत्र: प्रखंड की ढ़ोली और बनैनियां पंचायतें पूरी तरह से कोशी पूर्वी तटबंध के भीतर ही स्थित हैं, जहां सबसे पहले पानी का दबाव बढ़ता है.
- आंशिक रूप से प्रभावित क्षेत्र: इसके अलावा लौकहा, भपटियाही और सरायगढ़ पंचायतों के भी कई राजस्व ग्राम और टोले तटबंध के अंदर बसे हैं, जहां की कच्ची सड़कें कीचड़ और जलजमाव के कारण ब्लॉक हो गई हैं.
आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार: RO
नदी की बदलती धारा और सुरक्षात्मक उपायों को लेकर अंचल अधिकारी (रास्व अधिकारी) ने प्रशासनिक मुस्तैदी का दावा किया है:
"कोशी पूर्वी तटबंध के भीतर जलस्तर की हर गतिविधि पर हमारी पैनी नजर है. जल संसाधन विभाग के अभियंताओं के साथ मिलकर तटबंध की लगातार गश्ती और निगरानी की जा रही है. निचले इलाकों के ग्रामीणों को सतर्क कर दिया गया है. किसी भी आपात स्थिति या जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि होने पर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और राहत पहुंचाने के लिए नावों व आश्रय स्थलों की आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं." — राकेश रंजन, राजस्व अधिकारी (RO), सरायगढ़
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लेखक के बारे में
By राजीव कुमार झा
राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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