निजी शिक्षक को आजीवन कारावास की सजा

Published at :03 Mar 2025 6:40 PM (IST)
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निजी शिक्षक को आजीवन कारावास की सजा

अर्थदंड की राशि नहीं देने पर 06 माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी

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पांच वर्षो के बाद पीड़िता को मिला न्याय, एडीजे षष्टम की अदालत ने सुनायी सजा सुपौल. शिक्षक के हाथों दुष्कर्म की शिकार बनी कक्षा 05 की छात्रा को आखिरकार पांच वर्षो के बाद इंसाफ के मंदिर में न्याय मिला. सोमवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम सह विशेष न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश पोक्सो बृज किशोर सिंह की अदालत ने दुष्कर्मी निजी शिक्षक संजीत कुमार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. अर्थदंड की राशि नहीं देने पर 06 माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. मामला छातापुर थाना कांड संख्या 154 /2019 से संबंधित है. इसमें कक्षा 05 की छात्रा राजेश्वरी ओपी स्थित कटही ट्यूशन पढ़ने गई थी. इसी दौरान ट्यूशन पढ़ाने वाला शिक्षक संजीत कुमार ने छात्रा को एक कमरा में ले जाकर उसके साथ मुंह काला किया. घटना के बाद छात्रा को उसके घर के पास लाकर छोड़ दिया. इसके बाद पीड़िता के भाई ने मामला दर्ज कराया था. क्या था मामला दर्ज मामला में पीड़िता के भाई ने कहा था कि आरोपित अपने घर पर ही ट्यूशन पढ़ता था. वहां उसकी बहन भी ट्यूशन पढ़ने जाती थी. अन्य दिनों की भांति 15 जून 2019 को भी वह ट्यूशन पढ़ने गई. शाम करीब 06 बजे संजीत ने उसकी बहन को पानी लाने को कहा. जब उसकी बहन पानी लाने गयी तो पीछे से संजीत भी पहुंच गया और उसे जोर जबरदस्ती उठाकर अपने कमरे में ले गया फिर दुष्कर्म किया. इससे उसकी बहन बेहोश हो गई. इसके बाद संजीत ने उसे बाइक से उसके घर के पास छोड़ दिया. उनकी बहन जब होश में आई तो किसी तरह घर पहुंची और आप बीती बताई. मेडिकल जांच में दुष्कर्म की हुई थी पुष्टि सुनवाई उपरांत उक्त कोर्ट ने अभियुक्त संजीत कुमार को दोषी करार करते हुए भादवि की धारा 376 (3) के तहत आजीवन कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड, पोक्सो अधिनियम की धारा (42 ) एवं 06 के तहत जीवन के अंतिम क्षण तक आजीवन कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अर्थदंड की राशि नहीं देने पर जहां अतिरिक्त 06 माह की सजा भुगतनी होगी. वहीं पूर्व में बितायी गई अवधि दी गई सजा में समायोजित की जाएगी. अभियोजन पक्ष की अधिवक्ता विशेष लोक अभियोजक पोक्सो नीलम कुमारी ने बताई की सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए जहां मेडिकल रिपोर्ट दुष्कर्म की बात को पुष्टि कर रहा था. वही पीड़िता और दुष्कर्मी के कपड़े की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भागलपुर भी भेजा गया. जांचोपरांत दुष्कर्म की बात की पुष्टि हुई. इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक पोक्सो नीलम कुमारी व बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता करुणाकांत झा ने बहस में हिस्सा लिया.

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