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मन ही बंधन व मोक्ष का है कारण : अमृता भारती

Updated at : 27 Nov 2024 6:28 PM (IST)
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मन ही बंधन व मोक्ष का है कारण : अमृता भारती

पूर्व कर्मों के अनुसार भाग्य लिखा जाता है और उसी के अनुसार हम सुख-दुख प्राप्त करते हैं

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पिपरा. बाजार स्थित विनोबा मैदान में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम के तीसरे दिन सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी अमृता भारती ने कहा कि अहिंसा परमो धर्म:. आज समाज में हर इंसान के मन में एक कसाई बैठा है जो अपने स्वार्थ और वासनाओं का कटारी चल रहा है. इस अहिंसा को हम आत्मज्ञान द्वारा ही खत्म कर सकते हैं. जब तक यह मन ज्ञान द्वारा आत्मा से जुड़ता नहीं तब तक यह हिंसक वृत्ति नहीं छोड़ सकता. क्योंकि ज्ञान के अभाव में अज्ञानी मानवीय चेतना पाप पुण्य के बीच भेद नहीं कर पाता. साध्वी जी ने कहा कि मन ही बंधन और मोक्ष दोनों का कारण है. जिस प्रकार एक दिशा में चाबी घूमने से ताला बंद होता है और दूसरी दिशा में घूमने से ताला खुल जाता है ठीक इसी प्रकार मन को जैसी दशा देंगे वैसी दशा होगी. शिष्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी ने कहा कि कर्म प्रधान विश्व रचि राखा. पूर्व कर्मों के अनुसार भाग्य लिखा जाता है और उसी के अनुसार हम सुख-दुख प्राप्त करते हैं. जिन पूर्व कर्मों के कारण हम सुख-दुख प्राप्त करते हैं उन कर्मों को नष्ट करने का एक ही उपाय है जो सभी संतो और ग्रंथों में बताया गया है. गीता में भगवान श्री कृष्णा कहते हैं कि ज्ञानाग्नि सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरूते तथा अर्थात जिस प्रकार अग्नि लकड़ी को जलाकर राख कर देती है ठीक इसी प्रकार ज्ञान अग्नि सभी संचित, प्रारब्ध और क्रियावान तीनों कर्मों को जलाकर भस्म कर देती है. कार्यक्रम में सरिता भारती, प्रीति भारती, गायक गोपाल जी, जय नारायण जी, तबले पर रामचंद्र जी, संजय जी, अरविंद जी, कैलाश जी, एवं समस्त पिपरा क्षेत्र वासियों का सहयोग सराहनीय रहा.

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