श्रमदान और अर्थदान से सुरसर नदी पर बन रहा लोहे का चचरी पुल, ग्रामीणों में उत्साह

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निर्माण स्थल के पास मौजूद ग्रामीण.

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छातापुर के ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने के लिए अनोखी पहल की है. सुरसर नदी पर लोहे का मजबूत चचरी पुल श्रमदान और अर्थदान से तैयार हो रहा है, जिससे क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह है. यह पुल अब आवागमन को बेहद सुगम बनाएगा.

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छातापुर (सुपौल) से संजय कुमार पप्पू की रिपोर्ट

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प्रखंड की झखाड़गढ़ पंचायत स्थित सुरसर नदी के शिवनी घाट पर वर्षों से पुल निर्माण की मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद पहल करते हुए श्रमदान और अर्थदान से लोहे का चचरी पुल बनाना शुरू कर दिया है. करीब चार लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस पुल को लेकर क्षेत्र के लोगों में काफी उत्साह है.

चार लाख की लागत से बन रहा 175 फीट लंबा पुल

ग्रामीणों के सहयोग से करीब चार लाख रुपये एकत्र कर 175 फीट लंबा और छह फीट चौड़ा लोहे का चचरी पुल बनाया जा रहा है. रोजमर्रा के आवागमन को सुगम बनाने के लिए ग्रामीण स्वयं निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले करीब पांच दशकों से वे बांस की चचरी बनाकर नदी पार करने को मजबूर थे. हर वर्ष इसके निर्माण पर हजारों रुपये खर्च होते थे और दुर्घटना का खतरा भी बना रहता था. इसी कारण इस बार लोहे की सामग्री से मजबूत चचरी पुल तैयार किया जा रहा है.

मजबूत संरचना के साथ हो रहा निर्माण

पुल निर्माण में पिलर की जगह लोहे के मजबूत खंभे लगाए जा रहे हैं. इन पर मजबूत एंगल की वेल्डिंग की जा रही है और ऊपर लोहे की चादर बिछाने की योजना है, ताकि बाइक सवारों के साथ-साथ पैदल यात्री भी सुरक्षित तरीके से नदी पार कर सकें.

पांच दशक से की जा रही थी स्थायी पुल की मांग

घाट पर मौजूद पैक्स अध्यक्ष बिंदेश्वरी सिंह, पूर्व मुखिया प्रतिनिधि वीरेंद्र प्रसाद सिंह, उपमुखिया विनोद कुमार सिंह, रामनारायण सिंह, संतलाल सिंह, शिवनंदन सिंह, लालमोहन पासवान, अजीत सिंह, नित्यानंद सिंह, जगमोहन पासवान, कामेश मंडल, अभिनंदन कुमार, जयप्रकाश सिंह, पवन सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि शिवनी घाट पर स्थायी पुल निर्माण की मांग पिछले करीब 50 वर्षों से की जा रही है. सांसद, विधायक और प्रशासन से कई बार लिखित एवं मौखिक अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी.

इलाके के लिए बेहद महत्वपूर्ण है शिवनी घाट

ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत की आधे से अधिक आबादी सुरसर नदी के पश्चिमी हिस्से में रहती है, जबकि मध्य विद्यालय, हाईस्कूल और प्लस-टू विद्यालय नदी के पूर्वी भाग में स्थित हैं. इसके अलावा लगभग 80 प्रतिशत खेत-खलिहान और पशुओं के चारे की व्यवस्था भी नदी के उस पार है. उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों में विभागीय अधिकारियों ने तीन बार स्थल का मिट्टी परीक्षण किया, लेकिन अब तक स्थायी पुल निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका.

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