16 मई से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास, एक महीने तक नहीं होंगे शादी-विवाह
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 15 May 2026 6:55 AM
Dharmendranath Mishra
Malmas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, 16 मई 2026 से 'मलमास' का आगाज हो रहा है, जिसे 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है. अगले एक महीने यानी 15 जून तक शादी-ब्याह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे तमाम शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी. पंडित आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र के अनुसार, यह समय भौतिक उत्सवों का नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना को जगाने और भगवान विष्णु की शरण में जाने का है.
Malmas 2026: सुपौल से राजीव झा की रिपोर्ट, 16 मई से शुरू हो रहा मलमास यानी पुरुषोत्तम मास धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. इस पवित्र माह के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा, जबकि पूजा-पाठ, जप, तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व रहेगा। यह पावन मास 15 जून तक चलेगा.
धर्माचार्यों के अनुसार पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, भक्ति और पुण्य संचय का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है.
आखिर क्यों खास होता है मलमास?
Dharmendranath Mishra ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लगभग 32 महीने 18 दिन के अंतराल पर अधिक मास आता है. जिस अवधि में सूर्य का संक्रांति परिवर्तन नहीं होता, उसे मलमास या अधिक मास कहा जाता है.
उन्होंने बताया कि भगवान Vishnu इस मास के अधिपति माने जाते हैं, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर यह मास अमावस्या तक चलता है और इसकी पूर्णिमा मध्य में पड़ती है.
इस माह में क्यों रुक जाते हैं मांगलिक कार्य?
धर्मशास्त्रों के अनुसार मलमास में विवाह, गृह प्रवेश, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा, नया घर निर्माण, उपनयन संस्कार और चूड़ाकर्म जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते. इसे सांसारिक उत्सवों से अधिक आध्यात्मिक साधना का समय माना गया है.
हालांकि इस दौरान स्नान, दान, जप, हवन, स्वाध्याय, पितृ तर्पण और देव पूजन करने का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में किए गए दान-पुण्य का अक्षय फल प्राप्त होता है.
भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व
आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने कहा कि इस पूरे माह में भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करना बेहद शुभ माना जाता है. उन्होंने लोगों से नियमित पंचमहायज्ञ, पर्व श्राद्ध और दैनिक धार्मिक कर्म जारी रखने की अपील की.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह माह आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का प्रतीक है. यही कारण है कि श्रद्धालु इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करते हैं.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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