नेपाल की बाढ़ चेतावनी के बीच कोसी बराज पर मेंटेनेंस से बढ़ी चिंता, पीक मानसून में काम पर उठे सवाल

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नेपाल की बाढ़ चेतावनी के बीच कोसी बराज पर मेंटेनेंस से बढ़ी चिंता, पीक मानसून में काम पर उठे सवाल

कोसी बराज के फाटकों पर चल रहे मेंटेनेंस कार्य

Kosi Barrage News: नेपाल ने 30 जून और 1 जुलाई को अत्यधिक बारिश और अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है. इसी बीच कोसी बराज के फाटकों पर चल रहे पेंटिंग और मेंटेनेंस कार्य ने सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है. सवाल उठ रहे हैं कि जब मानसून अपने चरम पर है और नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, तब आखिर कोसी बराज पर बड़े पैमाने पर मेंटेनेंस कार्य क्यों कराया जा रहा है?

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वीरपुर (सुपौल) से प्रमोद कुमार की रिपोर्ट

Kosi Barrage News: नेपाल सरकार के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग की ओर से भारी बारिश और अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी होने के बाद बिहार-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गयी है. इस बीच सुपौल जिले के वीरपुर स्थित कोसी बराज के 56 फाटकों पर चल रहे पेंटिंग और मेंटेनेंस कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता बढ़ गयी है. ग्रामीणों और तटबंध के भीतर रहने वाले लोगों का कहना है कि जून से सितंबर के बीच का समय कोसी के लिए सबसे संवेदनशील होता है. ऐसे में फाटकों पर इस तरह का कार्य किसी बड़े जोखिम को जन्म दे सकता है.

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नेपाल की चेतावनी ने बढ़ायी चिंता

नेपाल सरकार ने आगामी 30 जून और 1 जुलाई को अत्यधिक वर्षा और फ्लैश फ्लड की आशंका जतायी है. कोसी नदी का उद्गम नेपाल में होने के कारण वहां होने वाली भारी बारिश का सीधा असर बिहार के सीमावर्ती जिलों पर पड़ता है.

नेपाल की बाढ़ चेतावनी

नेपाल की चेतावनी के बाद सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया समेत कोसी क्षेत्र के लोग पहले से ही सतर्क हैं. ऐसे में बराज पर चल रहे मेंटेनेंस कार्य ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है.

20 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा है मेंटेनेंस

जानकारी के अनुसार कोसी बराज के 56 फाटकों के रखरखाव, रंग-रोगन और अन्य यांत्रिक कार्यों का पांच वर्षीय ठेका त्रिकला इंडस्ट्रीज लिमिटेड, पटना को लगभग 20.60 करोड़ रुपये में दिया गया है.

वर्तमान में बराज के फाटकों पर सैंड ब्लास्टिंग, प्राइमर और पेंटिंग का कार्य चल रहा है. कार्य के दौरान निर्माण सामग्री बराज पुल पर रखी जा रही है, जिससे पुल का लगभग आधा हिस्सा बाधित हो गया है.

राष्ट्रीय राजमार्ग-57 पर बढ़ रही परेशानी

कोसी बराज का पुल बिहार और नेपाल को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है. यह राष्ट्रीय राजमार्ग-57 का हिस्सा है और प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण सामग्री के कारण पुल पर अक्सर जाम की स्थिति बन रही है. इससे आम लोगों, व्यापारियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

लगातार बढ़ रहा कोसी का जलस्तर

इधर कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. सोमवार सुबह आठ बजे कोसी बराज पर 85,830 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया, जिसके लिए नौ फाटक खोले गये हैं.

इससे पहले 22 जून को जलप्रवाह बढ़कर 1,86,385 क्यूसेक तक पहुंच गया था और तब 22 फाटक खोलने पड़े थे. वहीं नेपाल के बराहक्षेत्र में इस सीजन में जलप्रवाह 1.23 लाख क्यूसेक तक पहुंच चुका है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2024 में कोसी का अधिकतम डिस्चार्ज 6.61 लाख क्यूसेक और वर्ष 2025 में 5.34 लाख क्यूसेक तक पहुंच चुका है. ऐसे में नदी कब विकराल रूप धारण कर ले, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है.

लोगों ने उठाये सवाल, पीक मानसून में काम रोकने की मांग

ग्रामीणों और तटबंध के भीतर रहने वाले लोगों का कहना है कि कोसी बराज के फाटकों का मेंटेनेंस अक्टूबर से मार्च के बीच कराया जाना चाहिए, जब नदी का जलप्रवाह सामान्य रहता है.

लोगों का तर्क है कि जून से सितंबर तक के पीक मानसून सीजन में सभी फाटक पूरी तरह संचालन योग्य स्थिति में रहने चाहिए और बराज पुल को निर्माण सामग्री से मुक्त रखा जाना चाहिए.

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान यदि एक भी फाटक तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित हुआ, तो सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जैसे जिले गंभीर संकट में पड़ सकते हैं.

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Kosi Barrage News: क्या कहता है विभाग?

यांत्रिक प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अंकित कुमार का कहना है कि निर्धारित मानकों के तहत बाढ़ अवधि में भी कुछ कार्य किये जा सकते हैं.

उन्होंने बताया कि यदि कैनाल संचालित नहीं हो रहा हो, तो सैंड ब्लास्टिंग और अन्य कार्य किये जाते हैं. लगातार बारिश होने की स्थिति में पेंटिंग का कार्य रोक दिया जाता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बाढ़ के दौरान पूरी पेंटिंग प्रक्रिया पूरी कर पाना हमेशा संभव नहीं होता और एक फाटक पर काम पूरा करने में करीब 10 दिन लगते हैं.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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