कालाजार उन्मूलन अभियान : छह प्रखंडों में 60 दिनों तक होगा एसपी का छिड़काव

Published at :18 Feb 2025 6:13 PM (IST)
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कालाजार उन्मूलन अभियान : छह प्रखंडों में 60 दिनों तक होगा एसपी का छिड़काव

पहले चरण में यह अभियान 18 फरवरी से 19 अप्रैल तक चलाया जायेगा

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– 18 फरवरी से 19 अप्रैल तक चलाया जायेगा अभियान- लोगों को साफ-सफाई को लेकर किया जायेगा जागरूकसुपौल. जिले में कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सिंथेटिक पायरोथायराइड (एसपी) कीटनाशक छिड़काव जिले के कालाजार प्रभावित छह प्रखंडों में शुरुआत की गई. पहले चरण में यह अभियान 18 फरवरी से 19 अप्रैल तक चलाया जायेगा. कुल 60 दिनों तक जिले के 06 प्रखंडों में इसका छिड़काव किया जायेगा. सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर ने बताया अभियान के दौरान लोगों को मच्छरदानी लगाकर सोने, घरों के आसपास साफ-सफाई रखने और नालियों को साफ रखने के लिए स्वास्थ्य कर्मी के माध्यम से जागरूक किया जाएगा. ताकि लोगों को वेक्टर जनित रोग जैसे कालाजार, मलेरिया, डेंगू से बचाव के लिए प्रेरित किया जा सके. उन्होंने बताया छिड़काव के पूर्व घर की अंदरूनी दीवार की छेद, दरार बंद कर दें, घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अंदरूनी दीवारों पर छह फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं एवं छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें. छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें. ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एसपी) का असर बना रहे.

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीप नारायण राम ने बताया जिला के 06 प्रखंड के 15 राजस्व ग्रामों में कालाजार नियंत्रणार्थ एसपी छिड़काव किया जाएगा. जिसमें सदर सुपौल, किशनपुर, राघोपुर, त्रिवेणीगंज, बसंतपुर, निर्मली के 26 हजार 289 घरों के 01 लाख 52 हजार 107 पापुलेशन के बीच छिड़काव किया जाएगा. जिसके लिए कुल 1426 किलो एसपी उपलब्ध कराई गई है तथा कुल 09 दल बनाए गए हैं.

कालाजार के कारण

भीडीसीओ विपिन कुमार ने बताया कालाजार मादा फ्लेबोटोमस अर्जेंटिपस (बालू मक्खी) के काटने के कारण होता है. जो कि लीशमैनिया परजीवी का वेक्टर (या ट्रांसमीटर) है. किसी जानवर या मनुष्य को काट कर हटने के बाद भी अगर वह उस जानवर या मानव के खून से युक्त है तो अगला व्यक्ति जिसे वह काटेगा वह संक्रमित हो जायेगा. इस प्रारंभिक संक्रमण के बाद के महीनों में यह बीमारी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है. जिसे आंत में लिशमानियासिस या कालाजार कहा जाता है.

2022 में मिले सबसे अधिक मरीज

भीडीसीओ सिकंदर कुमार ने बताया जिले में लगातार छिड़काव के कारण कालाजार उन्मूलन के लिए भारत सरकार का जो मानक है उसे प्राप्त किया जा चुका है. मरीजों की संख्या शून्य करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है. जिले में वर्ष 2021 में 03, 2022 में 10, 2023 में 05, 2024 में 03 मरीज मिले हैं.

सरकार द्वारा रोगी को मिलती है आर्थिक सहायता

भीडीसीओ अनीसा भारती ने बताया कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में आर्थिक सहायता भी दी जाती है. बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं. यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है. वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) में 4000 रुपये की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है.

कालाजार के लक्षण

– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना – वजन में लगातार कमी होना- दुर्बलता- मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना- व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है- प्लीहा में नुकसान होता है

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