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अवैध लॉटरी रैकेट का भंडाफोड़, पटेल चौक पर छापेमारी में दो गिरफ्तार, माफिया नेपाल फरार

छोटे स्तर से शुरू हुआ, फिर बना बड़ा सिंडिकेट

सुपौल. सुपौल शहर में लंबे समय से चल रहे अवैध लॉटरी कारोबार का आखिरकार पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है. पटेल चौक के पास देर रात की गई छापेमारी में पुलिस ने इस गोरखधंधे से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया है. कार्रवाई के बाद लॉटरी माफियाओं और उनसे जुड़े सफेदपोशों में हड़कंप मच गया है. कई प्रभावशाली लोग पुलिस की भनक लगते ही घर छोड़कर फरार हो गए हैं, जबकि कुछ माफिया नेपाल की ओर भाग निकले हैं. पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर के व्यस्त इलाके में चाय-पान की एक गुमटी की आड़ में अवैध लॉटरी का कारोबार चलाया जा रहा है. सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने रणनीति बनाकर देर रात छापेमारी की और मौके से लॉटरी से जुड़े कागजात, रजिस्टर, मोबाइल फोन और नकदी बरामद की. छोटे स्तर से शुरू हुआ, फिर बना बड़ा सिंडिकेट पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह अवैध लॉटरी कारोबार पहले जिला मुख्यालय से बाहर सिमराही बाजार से लिंक बनाकर छोटे पैमाने पर चलाया जाता था. शुरुआत में यह सीमित दायरे में था, लेकिन धीरे-धीरे माफियाओं ने इसे संगठित रूप देकर स्थानीय स्तर पर प्रिंटिंग सिस्टम शुरू किया और फिर पश्चिम बंगाल से कनेक्शन जोड़कर बड़े पैमाने पर कारोबार फैलाया. अब लॉटरी टिकट, नंबर सिस्टम और रिजल्ट का संचालन पूरी तरह नेटवर्क के जरिए किया जा रहा था. इससे हर दिन लाखों रुपये का अवैध लेन-देन होने लगा था. मैनेज सिस्टम से चलता रहा धंधा हालांकि यह कहना गलत होगा कि पुलिस को इस अवैध कारोबार की भनक नहीं थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यह धंधा खुलेआम चल रहा था, लेकिन माफियाओं ने मैनेज सिस्टम के जरिए अपना नेटवर्क सुरक्षित रखा हुआ था. सूत्रों के मुताबिक, कुछ लोगों को हर महीने तय रकम दी जाती थी, जिससे छापेमारी और कार्रवाई से पहले सूचना मिल जाती थी. इसी वजह से लंबे समय तक यह अवैध धंधा बेखौफ चलता रहा. गुमटी में बिकते थे लॉटरी नंबर पटेल चौक के पास एक साधारण सी दिखने वाली चाय-पान की गुमटी से रोजाना लॉटरी नंबर बेचे जाते थे. आम लोग चाय पीने के बहाने वहां पहुंचते और अपने नंबर लगा देते थे. शाम होते-होते रिजल्ट घोषित हो जाता और जीतने वालों को नकद भुगतान किया जाता था. गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि यह पूरा सिस्टम नेटवर्क के जरिए संचालित होता था. ऊपर से नीचे तक एक मजबूत सिंडिकेट काम कर रहा था. छापेमारी के बाद मचा हड़कंप जैसे ही पुलिस की कार्रवाई की खबर फैली, पूरे शहर में हड़कंप मच गया. कई सफेदपोश लोग, जिनके नाम इस सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं. अपने घर छोड़कर फरार हो गए. वहीं, कुछ बड़े माफिया नेपाल सीमा पार कर भाग निकले. पुलिस अब इन फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है. नेपाल पुलिस व एसएसबी से भी संपर्क साधा जा रहा है. सफेदपोशों की भूमिका की जांच पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस अवैध लॉटरी कारोबार को बिना किसी संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर चलाना संभव नहीं था. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि किन लोगों ने माफियाओं को संरक्षण दिया, कौन-कौन सफेदपोश इस धंधे में शामिल हैं. पैसों का लेन-देन कहां और कैसे होता था. मोबाइल कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट और बैंक लेन-देन की जांच की जा रही है. नेपाल व बंगाल कनेक्शन सीमावर्ती जिला होने के कारण सुपौल में नेपाल से आवाजाही आसान है. इसी का फायदा उठाकर कई माफिया नेपाल में बैठकर अपना नेटवर्क चला रहे थे. वहीं, पश्चिम बंगाल से प्रिंटिंग और नंबर सिस्टम का कनेक्शन जुड़ा हुआ था. पुलिस को शक है कि लॉटरी से जुड़े कई मास्टरमाइंड अभी भी नेपाल में छिपे हुए हैं. लॉटरी के साथ-साथ फल-फूल रहा जमीन दलाली का अवैध कारोबार लॉटरी कारोबार के साथ ही सुपौल शहर में अवैध जमीन दलाली का धंधा भी तेजी से बढ़ रहा है. कई ऐसे लोग जो लॉटरी सिंडिकेट से जुड़े हैं, वही जमीन के अवैध सौदों में भी सक्रिय हैं. फर्जी कागजात, नकली पावर ऑफ अटॉर्नी और दबंगई के दम पर जमीन कब्जाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इससे शहर में जमीन विवाद के मामले तेजी से बढ़े हैं. जमीन विवाद से बिगड़ रहा सामाजिक माहौल पिछले कुछ महीनों में सुपौल में जमीन को लेकर कई विवाद सामने आए है. जिनमें मारपीट, धमकी और कोर्ट केस तक की नौबत आ चुकी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ माफिया गिरोह जमीन कब्जा कर मोटी कमाई कर रहे है. इन गिरोहों को राजनीतिक संरक्षण मिलने की भी चर्चा है. जिससे इनके हौसले और बुलंद हो गए है. कहते हैं थानाध्यक्ष थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने बताया कि मामले में राजेश मंडल, विकास कुमार को गिरफ्तार किया गया. जिसके पास से 1050 लॉटरी टिकट, 10 हजार 100 रुपया, दो मोबाइल एक कार बरामद किया गया. मामले में अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया.

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