गांधी मैदान में शिल्प उत्सव मेला बना आकर्षण का केंद्र

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स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को उमड़ रही भीड़

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– स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को उमड़ रही भीड़ सुपौल. शहर के गांधी मैदान में 19 दिसंबर से 07 जनवरी तक लगने वाला शिल्प उत्सव मेला इन दिनों लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इस मेले के माध्यम से घरेलू उपयोग की वस्तुओं के साथ-साथ हस्तनिर्मित स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री की जा रही है. ठंड के मौसम में खादी, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट से बने उत्पादों की खास मांग देखने को मिल रही है. शिल्प उत्सव मेला के संयोजक सुधीर शर्मा ने बताया कि बीते 19 दिसंबर को विधिवत गणेश पूजा के साथ मेले का उद्घाटन किया गया था. उन्होंने कहा कि गांधी मैदान में इस मेले के आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को जन-जन तक पहुंचाना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना है. स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री बढ़े, इसी लक्ष्य के साथ यह शिल्प उत्सव मेला आयोजित किया गया है. मेला संयोजक ने बताया कि इस मेले में देश के 16 राज्यों से आए शिल्पकार और कारीगर भाग ले रहे हैं, जो अपने-अपने राज्यों की विशिष्ट हस्तनिर्मित वस्तुओं का प्रदर्शन कर रहे हैं. मेले में खादी एवं ग्रामोद्योग से निर्मित गर्म कपड़े, ऊनी वस्त्र, स्वेटर, शॉल, बंडी, कुर्ता-पायजामा, शर्ट आदि की जमकर बिक्री हो रही है. ठंड को देखते हुए लोगों में खादी से बने कपड़ों को लेकर विशेष रुचि देखी जा रही है. इसके अलावा मेले में लकड़ी से बने फर्नीचर, हस्तनिर्मित खिलौने, सजावटी सामग्री व खादी ग्रामोद्योग द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवाइयों की भी खास मांग है. खासकर आयुर्वेदिक उत्पाद लोगों के बीच आकर्षण का विषय बने हुए हैं. देहरादून से आए पारस आयुर्वेदिक संस्था के प्रतिनिधि अतुल त्रिवेदी ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग बोर्ड एवं शिल्प मेला के माध्यम से वे देशभर में स्वदेशी आयुर्वेदिक उत्पादों को आम लोगों तक पहुंचा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके यहां आयुर्वेद की लगभग हर बीमारी की दवा उपलब्ध है, जो किफायती, गुणकारी और असरदार है. सर्दियों के मौसम में शुद्ध एवं उच्च गुणवत्ता वाले गुड़ से बना च्यवनप्राश लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. इसके अलावा दर्द निवारक, शुगर, हार्ट, बवासीर, बीपी, गैस सहित अन्य आयुर्वेदिक दवाइयों की भी अच्छी बिक्री हो रही है. अतुल त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा भी स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है. स्वदेशी उत्पादों की बिक्री बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, जबकि विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था को कमजोर बनाती है. ऐसे में स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी कर देश की आर्थिक मजबूती में योगदान देना प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है. उन्होंने यह भी कहा कि स्वदेशी वस्तुएं न केवल गुणवत्ता में बेहतर होती है. बल्कि उचित और सस्ते दामों पर भी उपलब्ध रहती है. इसके विपरीत विदेशी कंपनियां महंगे विज्ञापनों के सहारे अपने उत्पाद बेचती हैं, जिससे उपभोक्ता का स्वास्थ्य और धन दोनों प्रभावित होते हैं. भारत सरकार द्वारा स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय है.

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RAJEEV KUMAR JHA

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