पर्यावरण संरक्षण में मिसाल बने सुपौल के किसान भिखारी मेहता

गणतंत्र दिवस पर राजभवन के एट होम फंक्श्न में होंगे सम्मानित
गणतंत्र दिवस पर राजभवन के एट होम फंक्श्न में होंगे सम्मानित वीरपुर. गणतंत्र दिवस समारोह 2026 के अवसर पर राजभवन, पटना में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित एट होम फंक्श्न में प्रगतिशील किसान भिखारी मेहता को विशेष आमंत्रण मिला है. यह आमंत्रण उन्हें पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है. प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना के कार्यालय द्वारा राज्यपाल सचिवालय को भेजे गए पत्र के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों की सूची में सुपौल जिले से किसान भिखारी मेहता का नाम शामिल किया गया है. साधारण शिक्षा, असाधारण सोच किसान भूषण सम्मान से सम्मानित भिखारी मेहता वीरपुर प्रखंड के वार्ड संख्या 06 निवासी हैं. वे सोनाई मेहता के पुत्र हैं. उनका जन्म करजाईन बाजार के समीप जगदीशपुर गांव में हुआ. आर्थिक तंगी के कारण वे उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके. उनकी शैक्षणिक योग्यता अंडर मैट्रिक है. वर्ष 1976 में मध्य विद्यालय के बाद पढ़ाई छोड़कर उन्होंने पिता के साथ खेती का कार्य शुरू कर दिया. आधा एकड़ से 110 एकड़ तक का सफर वर्ष 1981-85 के बीच भिखारी मेहता ने करजाईन में आधा एकड़ जमीन से सब्जी की खेती शुरू की. 1986 से 1996 तक बहुअरवा गांव में पट्टे की जमीन पर केला और सब्जी की खेती की. वर्ष 1997 से उन्होंने वीरपुर के बसमतिया रोड स्थित रानीपट्टी क्षेत्र में अपनी निजी एवं पट्टे की जमीन पर खस, पोपुलर, मेंथा, लेमनग्रास तथा फलदार पौधों की नर्सरी नई तकनीक से शुरू की. 2005 में पूर्णिया में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सुगंध एवं समग्र विकास संस्थान से वर्मी कंपोस्ट एवं औषधीय पौधों की खेती का प्रशिक्षण मिला. इसके बाद 2007 तक उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाकर लगभग 110 एकड़ तक पहुंचा दिया. रासायनिक खाद के स्थान पर वर्मी कंपोस्ट के प्रयोग से उन्होंने खेती को सफल और पर्यावरण के अनुकूल बनाया. किसान भूषण से राष्ट्रीय पहचान वर्ष 2007 में किसान सम्मान योजना के तहत उन्हें किसान भूषण सम्मान मिला. इसके बाद सरकार द्वारा नई तकनीक से खेती के प्रशिक्षण हेतु देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया. हालांकि स्वास्थ्य कारणों से बाद में उन्होंने खेती का दायरा सीमित किया. लेकिन आज भी वे लगभग 15 एकड़ में नर्सरी व्यवसाय कर रहे हैं, जहां करीब पांच लाख पौधे मौजूद हैं. भिखारी मेहता का कहना है कि लगातार रासायनिक खाद के प्रयोग से भूमि की उर्वरता घट रही है. किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा. कोसी एवं पूर्णिया प्रमंडल, विशेषकर कुसहा त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में जमीन का समतलीकरण नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. आज भी कई स्थानों पर फसलों की जगह काश और जंगली पौधों का कब्जा है. यदि जमीन का समतलीकरण कराया जाए, तो क्षेत्र फिर से कृषि उत्पादन में अग्रणी बन सकता है. राजभवन से मिला यह आमंत्रण साबित करता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार, मेहनत और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता से किसान भी राष्ट्रीय पहचान बना सकते हैं.
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