मौसम परिवर्तन का दिखने लगा असर, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और बच्चों में संक्रमण के मामलों में तेजी
– वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और बच्चों में संक्रमण के मामलों में तेजी – डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की दी सलाह सुपौल. जिले में मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है. पिछले कुछ दिनों से दिन में हल्की गर्मी और सुबह-शाम ठंड का मिश्रित मौसम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है. इसका परिणाम यह है कि सदर अस्पताल सहित जिले के अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है. खासकर वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, गले में संक्रमण, बदन दर्द और बच्चों में बुखार के मामलों में तेजी देखी जा रही है. सदर अस्पताल के ओपीडी में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. इनमें बुजुर्ग, महिला और बच्चों की संख्या अधिक है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार पिछले एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है. मौसम के इस उतार-चढ़ाव के कारण लोगों की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. वायरल संक्रमण के मरीजों में हुई वृद्धि : डॉ बिमल सदर अस्पताल में कार्यरत डॉ बिमल कुमार ने बताया कि मौसम में अचानक हो रहे बदलाव के कारण वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ी है. उन्होंने कहा इस समय सबसे ज्यादा मरीज वायरल फीवर, सर्दी, खांसी और गले में खराश की शिकायत लेकर आ रहे हैं. दिन में गर्मी और सुबह-शाम ठंड के कारण लोग सावधानी नहीं बरतते, जिससे वे जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं. खासकर बुजुर्ग और पहले से किसी बीमारी से ग्रसित लोगों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है. कहा कि कई मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा ले लेते हैं, जिससे बीमारी और जटिल हो सकती है. उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार के बुखार या संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और स्वयं दवा लेने से बचें. साथ ही उन्होंने पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, संतुलित आहार लेने और ठंड से बचाव करने की सलाह दी. बदलते मौसम में सतर्कता ही बचाव : डॉ हरिशंकर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ हरिशंकर कुमार ने बताया कि बच्चों में भी वायरल संक्रमण के मामले बढ़े हैं. कहा इस समय छोटे बच्चों में बुखार, सर्दी, खांसी और सांस संबंधी समस्याएं ज्यादा देखी जा रही है. बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए वे जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं. अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को ठंड से बचाकर रखें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें. कहा कि बच्चों को गर्म कपड़े पहनाना, ठंडी चीजों से परहेज करना और समय-समय पर हाथ धोने की आदत डालना जरूरी है. यदि बच्चे को लगातार बुखार या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. अस्पताल प्रशासन ने भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. कहा कि यदि लोग समय रहते सावधानी बरतें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें, तो इन मौसमी बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है. मौसम में बदलाव के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है.
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