4 श्रम कोड की वापसी व लंबित भुगतान को लेकर आशा व फैसिलिटेटर ने किया हड़ताल
Published by : RAJEEV KUMAR JHA Updated At : 12 Feb 2026 6:33 PM
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद उन्हें सरकारी कर्मी का दर्जा नहीं दिया गया है
सुपौल. बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं सेवा फेडरेशनों के आह्वान पर गुरुवार को जिले के आशा कार्यकर्ता व फैसिलिटेटर देशव्यापी हड़ताल में शामिल हुई. संघ के जिला संयोजिका उषा सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए 4 श्रम कोड की वापसी सहित विभिन्न मांगों को लेकर यह अखिल भारतीय हड़ताल आयोजित की गई है. कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद उन्हें सरकारी कर्मी का दर्जा नहीं दिया गया है. मानदेय व प्रोत्साहन राशि में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई है. कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय और प्रोत्साहन राशि 06 से 07 महीनों से लंबित है. गर्भवती महिलाओं एवं बंध्याकरण से संबंधित भुगतान भी एक वर्ष से अटका हुआ है. इससे कार्यकर्ताओं के समक्ष आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है. मांग-पत्र में वर्ष 2023 के समझौते के अनुरूप मासिक मानदेय 1000 से बढ़ाकर 3500 रुपये करने, 21 हजार रुपये न्यूनतम बेसिक मानदेय तय करने, प्रोत्साहन राशि की दरों के पुनरीक्षण, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने तथा 10 लाख रुपये का रिटायरमेंट पैकेज और पेंशन की व्यवस्था करने की मांग शामिल है. साथ ही, सभी आशाओं को स्मार्टफोन उपलब्ध कराने और लौकहा पीएचसी में बंध्याकरण सेवा सुचारु करने की मांग भी उठाई गई है.
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