सुपौल के मोहनियां गांव में विराजते हैं बाबा हजारी महादेव, संतान प्राप्ति की कामना लेकर उमड़ते हैं श्रद्धालु
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 26 May 2026 7:10 AM
बाबा हजारी महादेव मंदिर
Aaj Ka Darshan:सुपौल के मोहनियां गांव स्थित बाबा हजारी महादेव मंदिर में एक शिवलिंग में हजारों शिवरूप दिखाई देते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है. जानें मंदिर का इतिहास और आस्था.
सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट.
Aaj Ka Darshan: गढ़ बरुआरी स्टेशन के पूरब स्थित मोहनियां गांव में विराजमान बाबा हजारी महादेव का प्राचीन शिवलिंग आज भी श्रद्धा, आस्था और रहस्यमयी मान्यताओं का केंद्र बना हुआ है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु संतान प्राप्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद कभी खाली नहीं जाती.
एक शिवलिंग में दिखते हैं हजारों शिवरूप
बाबा हजारी महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित अद्भुत शिवलिंग है. मान्यता है कि इस एक शिवलिंग में करीब एक हजार एक सौ छोटे-छोटे शिवलिंगों की आकृतियां मौजूद हैं. यही वजह है कि लोग इसे भगवान गौरी शंकर के चमत्कारी स्वरूप के रूप में भी देखते हैं.
मंदिर की स्थापना को लेकर कोई आधिकारिक ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं मिलते, लेकिन इसकी महिमा लोककथाओं और जनश्रुतियों में सदियों से जीवित है.
जरासंध की कथा से जुड़ी है मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मगधकालीन युग में वृहदस्त ने पराक्रमी पुत्र जरासंध की प्राप्ति के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की थी. तभी से यह विश्वास गहरा गया कि जो भी दंपति संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है.
इसी आस्था के कारण बिहार के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.
भूकंप से बदला मंदिर का स्वरूप, लेकिन नहीं टूटी आस्था
ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 1934 के विनाशकारी भूकंप से पहले मंदिर का स्वरूप अत्यंत भव्य था. उस समय दरभंगा से पांडिचेरी जाने वाला प्रमुख मार्ग इसी मंदिर के सामने से गुजरता था. शिवरात्रि के अवसर पर दरभंगा महाराज भी सिंहेश्वरनाथ धाम जाते समय यहां विश्राम करते थे.
इतिहास और लोकआस्था से जुड़ा यह मंदिर आज भी क्षेत्र की धार्मिक पहचान बना हुआ है.
सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धा की भीड़
सावन माह और महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है. भक्त जलाभिषेक कर संतान सुख, परिवार की खुशहाली और जीवन की मंगलकामना करते हैं.
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस ऐतिहासिक मंदिर का समुचित विकास हो तो यह धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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