खून हो रहा पानी, रिश्ते साबित हो रहे बेमानी

Updated at :25 Jan 2017 3:56 AM
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खून हो रहा पानी, रिश्ते साबित हो रहे बेमानी

जमीन का जाल निगल रहा है लोगों की जान सुपौल : जमीन का विवाद लोगों की जान निगल रहा है. आलम यह है कि आपसी रिश्ते भी अब जमीन विवाद के आगे बेमानी साबित हो रहे हैं, जबकि प्रशासन के लिए ऐसे मामलों पर नियंत्रण टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. आये दिन सामने आ […]

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जमीन का जाल निगल रहा है लोगों की जान

सुपौल : जमीन का विवाद लोगों की जान निगल रहा है. आलम यह है कि आपसी रिश्ते भी अब जमीन विवाद के आगे बेमानी साबित हो रहे हैं, जबकि प्रशासन के लिए ऐसे मामलों पर नियंत्रण टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. आये दिन सामने आ रहे जमीन विवाद और विवाद को लेकर मारपीट तथा हत्या की खबरें एक ओर सुर्खियां बटोर रही हैं. दूसरी ओर प्रशासन की सिरदर्दी यह है कि शराबबंदी के बाद से गिरते आपराधिक ग्राफ के बीच भी इन कांडों की वजह से क्राइम ग्राफ में कोई विशेष सुधार नहीं हो पा रहा है. जानकारों की मानें तो शीघ्र ही अगर ऐसे मामलों पर नियंत्रण को लेकर अगर ठोस कदम नहीं उठाये गये तो स्थिति गंभीर हो सकती है.
रिश्तों को भी धूमिल कर रहे हैं जमीन विवाद
जमीन विवाद के मामले में बीते एक माह में ही दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों की संख्या में लोग जख्मी हुए हैं, जो इस बात की ताकीद करता है कि जमीन विवाद रिश्तों की गरिमा को भी धूमिल कर रहा है.
छातापुर प्रखंड के मोहनपुर कटहरा पंचायत के शर्मा टोला में 26 दिसंबर को जमीन के ही एक विवाद में चाचा ने भतीजे की भाला घोंप कर हत्या कर दी. यहां शर्मा टोला निवासी रामदेश शर्मा के घर में बीते कुछ दिनों से पैतृक जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. संपत्ति बंटवारे को लेकर ही लड़ाई आरंभ हुई और अंत एक युवक की मौत के साथ मामला शांत हुआ. चाचा बेचन शर्मा ने भतीजा मनोज के सीने में भाला घोंप दिया. वहीं दूसरी घटना पिपरा थाना क्षेत्र के राजपुर में दिसंबर 2016 को बांस के एक विवाद में हुई मारपीट में अखिलेश कुमार झा की हत्या कर दी गयी. इसके अलावा विभिन्न थाना क्षेत्र में दर्जनों की संख्या जमीन विवाद को लेकर मारपीट का मामला बीते एक माह में ही सामने आया है, जबकि कई ऐसे मामले भी हैं, जो पुलिस तक नहीं पहुंच पाते हैं.
भू-माफियाओं की सक्रियता बड़ी वजह
जमीन विवाद में मारपीट व हत्या की खबरें यूं तो शहरीकरण के बीच कोई नयी बात नहीं है, लेकिन हाल के दौर में जिस प्रकार कोसी के इस इलाके में भी ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं, उसने इलाके वासियों की चिंता भी बढ़ा दी है. विशेष तौर पर एनएच 57 के निर्माण के बाद कोसी के इस इलाके में भी जमीन की कीमत आसमान छूने लगी है. कल तक लाखों की जमीन अब करोड़ों में बिक रही है. ऐसे में भू-माफियाओं की सक्रियता भी इस इलाके में तेजी से बढ़ती जा रही है. भू-माफियाओं की यही सक्रियता भूमि विवाद और विवाद में बढ़ती हत्या की घटनाओं का भी कारण बन रहा है. भू-माफिया कारोबार के लिए केवल वैसे जमीनों का ही चयन करते हैं, जो विवादित भूमि होती है. इसका मुख्य कारण यह है कि ऐसी जमीन उन्हें सस्ती कीमत पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जबकि इसकी अच्छी-खासी कीमत उन्हें वसूल हो जाती है और उनका लाभ कई गुणा तक होता है.
विवादित जमीन के कारोबार को तरजीह देते हैं भू-माफिया
अगर आप जमीन खरीद अथवा बिक्री की सोच रहे हैं, तो एक बार आपको सावधान होने की जरूरत है. क्योंकि जमीन खरीद के पूर्व आपको यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आप जिस जमीन के खरीद अथवा बिक्री की सोच रहे हैं, उसको लेकर आपकी बातचीत सीधे खरीदार अथवा विक्रेता से हो रही है. दरअसल जानकार बताते हैं कि भू-माफियाओं द्वारा कारोबार के लिए केवल वैसी जमीन का चयन किया जाता है, जो किसी भी मायने में विवादित होता है. औने-पौने भाव में भू-माफिया ऐसे जमीन की खरीद करते हैं. हालांकि माफिया केवल कीमत का कुछ हिस्सा ही भुगतान करते हैं और इसके लिए अनुबंध तैयार कर लिया जाता है. इसके बाद वैसे खरीदार की तलाश आरंभ हो जाती है, जो उस जमीन की लागत से अधिक कीमत का भुगतान कर सके. इसके बाद माफिया इस जमीन को अपना बता कर डील तय करते हैं और फिर विवादित जमीन नये खरीदार के गले में फांस दिया जाता है.
कहते हैं एसपी
जमीन विवाद संबंधी मामले में पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र के अंदर रह कर हर संभव कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है. इसके अलावा ऐसी घटनाओं की रोकथाम को लेकर पुलिस द्वारा विशेष पहल की जा रही है. लोगों को भी चाहिए कि विवाद के निबटारे को लेकर वे कानून का सहारा लें.
डाॅ कुमार एकले, पुलिस अधीक्षक, सुपौल
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