सड़क निर्माण में करोड़ों रुपये का गबन
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :17 Nov 2016 4:41 AM
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सख्ती. भ्रष्टाचारियों से 15 दिन के अंदर 01.63 करोड़ वसूलने का आदेश प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत हटवरिया-निर्मली पथ तथा जीवछपुर दुबियाही पथ के निर्माण में ग्रामीण कार्य प्रमंडल के अभियंताओं व संवेदक द्वारा बिना कार्य पूर्ण किये मापी पुस्तिका में कार्य पूर्ण दिखा कर करोड़ों रुपये की निकासी […]
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सख्ती. भ्रष्टाचारियों से 15 दिन के अंदर 01.63 करोड़ वसूलने का आदेश
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत हटवरिया-निर्मली पथ तथा जीवछपुर दुबियाही पथ के निर्माण में ग्रामीण कार्य प्रमंडल के अभियंताओं व संवेदक द्वारा बिना कार्य पूर्ण किये मापी पुस्तिका में कार्य पूर्ण दिखा कर करोड़ों रुपये की निकासी कर ली गयी और इस राशि का बंदरबांट कर लिया गया.
सुपौल : बिना कार्य पूर्ण किये सड़क निर्माण के नाम पर अभियंता व संवेदक के गंठजोड़ से करोड़ों रुपये गबन मामले में दोषी पाये गये अभियंताओं की मुश्किलें बढ़ गयी है. आयुक्त सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार कुंवर जंग बहादुर ने मंगलवार को एक परिवाद पर निर्णय सुनाते हुए दोषी अभियंताओं से एक करोड़ 63 लाख 79 हजार 416 रुपये वसूली करने का आदेश डीएम को दिया है.
15 दिनों के भीतर राशि की वसूली नहीं होने की स्थिति में गबन के लिए दोषी अभियंताओं व वर्तमान कार्यपालक अभियंता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जायेगी. आयुक्त के इस आदेश के बाद संबंधित अभियंताओं व संवेदक सहित गबन के इस खेल में संलिप्त लोगों में हड़कंप है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत हटवरिया-निर्मली पथ तथा जीवछपुर दुबियाही पथ के निर्माण में ग्रामीण कार्य प्रमंडल के अभियंताओं व संवेदक द्वारा बिना कार्य पूर्ण किये मापी पुस्तिका में कार्य पूर्ण दिखा कर करोड़ों रुपये की निकासी कर ली गयी और इस राशि का बंदरबांट कर लिया गया.
इसी मामले में आयुक्त कोसी प्रमंडल द्वारा उक्त आदेश जारी किया गया है.
तीन वर्ष बाद भी नहीं हुई राशि की वसूली : ग्रामीण कार्य विभाग बिहार सरकार ने सात अगस्त 2013 को कार्य प्रमंडल सुपौल में पीएमजीएसवाय के अंतर्गत निर्मली-हटवरिया पथ तथा जीवछपुर-दुबियाही पथ के निर्माण में भारी अनियमितता बरतने व गबन की गयी राशि की वसूली दोषी अभियंताओं व संवेदक से करने का आदेश ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सुपौल के कार्यपालक अभियंता को दिया था. विभागीय अभियंताओं से ही राशि की वसूली की जानी थी, इसलिए सरकार के इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया
और तीन वर्ष बाद भी राशि की वसूली नहीं हो पायी. शिकायतकर्ता ने राशि की वसूली नहीं होने की स्थिति में 19 जुलाई 2016 को जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में परिवाद पत्र दाखिल करते हुए राशि की वसूली व दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने विभिन्न तिथियों में सुनवाई की. सुनवाई करते हुए राशि वसूली का आदेश ग्रामीण कार्य विभाग के वर्तमान कार्यपालक अभियंता को दिया, लेकिन कार्यपालक अभियंता के द्वारा वसूली की कार्रवाई नहीं की गयी.
अंतत: लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अजय कुमार झा ने 20 सितंबर 2016 को अपना निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि विभागीय आदेश के बावजूद वर्ष 2013 से अभी तक पदस्थापित कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य प्रमंडल सुपौल द्वारा विभागीय पत्रांक 3048 दिनांक 07 अगस्त 2013 का अनुपालन नहीं कर सरकारी राशि की वसूली में लापरवाही एवं अनियमितता बरती गयी है.
निर्णय से व्यथित परिवादी ने आयुक्त के समक्ष दायर की अपील : सरकार, विभागीय संयुक्त सचिव व जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा जारी आदेश का अनुपालन नहीं होने एवं राशि की वसूली की दिशा में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से क्षुब्ध सामाजिक कार्यकर्ता ने 20 अक्तूबर को आयुक्त कोसी प्रमंडल सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार के समक्ष प्रथम अपील दायर किया. आयुक्त द्वारा सुनवाई की तिथि 15 नवंबर को निर्धारित करते हुए दोनों पक्ष को साक्ष्य के साथ उपस्थित होने का नोटिस जारी किया था.
परिवादी स्वयं उपस्थित थे, जबकि कार्यपालक अभियंता ने अपने प्रतिनिधि को सुनवाई में भेजा. दोनों पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य व सुनवाई के बाद आयुक्त कुंवर जंग बहादुर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम को 15 दिन के अंदर राशि वसूली सुनिश्चित करने का आदेश दिया है.15 दिनों के भीतर गबन की गयी राशि की वसूली नहीं होने की स्थिति में गबन के लिए दोषी अभियंता एवं वसूली नहीं करने वाले वर्तमान कार्यपालक अभियंता के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी.
आठ वर्ष बाद भी नहीं हुआ सड़क निर्माण पूर्ण
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत कार्य प्रमंडल सुपौल के वित्तीय वर्ष 2008-09 में पिपरा प्रखंड के निर्मली-हटवरिया पथ व जीवछपुर-दुबियाही पथ निर्माण की स्वीकृति दी गयी. कार्य पूर्ण करने की जवाबदेही सिल्लीगुड़ी पश्चिम बंगाल के संवेदक डीके इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्सन प्रालि को दी गयी. 28 फरवरी 2009 को कार्य प्रारंभ किया गया. जबकि कार्य समाप्ति की तिथि 27 फरवरी 2010 निर्धारित किया गया. दोनों पथों के निर्माण की कुल लागत राशि 08 करोड़ 51 लाख 52 हजार 800 रुपये निर्धारित किया गया.
संवेदक द्वारा 05 करोड़ 98 लाख 10 हजार 865 रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया गया जो किये गये कार्य से अधिक है. इस मामले में विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद भी कार्य पूर्ण नहीं किया गया. सबसे अहम पहलू यह है कि उच्च न्यायालय पटना द्वारा भी अविलंब कार्य पूर्ण करने का आदेश जारी किया गया था. लेकिन अभियंता एवं संवेदक द्वारा न्यायालय के आदेश को भी नजर अंदाज कर कार्य पूर्ण नहीं किया गया.इस वजह से वहां के लोग आठ वर्षों से जर्जर सड़क पर आवागमन के लिए विवश हैं.
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत कार्य प्रमंडल सुपौल के वित्तीय वर्ष 2008-09 में पिपरा प्रखंड के निर्मली-हटवरिया पथ व जीवछपुर-दुबियाही पथ निर्माण की स्वीकृति दी गयी. कार्य पूर्ण करने की जवाबदेही सिल्लीगुड़ी पश्चिम बंगाल के संवेदक डीके इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्सन प्रालि को दी गयी. 28 फरवरी 2009 को कार्य प्रारंभ किया गया. जबकि कार्य समाप्ति की तिथि 27 फरवरी 2010 निर्धारित किया गया. दोनों पथों के निर्माण की कुल लागत राशि 08 करोड़ 51 लाख 52 हजार 800 रुपये निर्धारित किया गया.
संवेदक द्वारा 05 करोड़ 98 लाख 10 हजार 865 रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया गया जो किये गये कार्य से अधिक है. इस मामले में विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद भी कार्य पूर्ण नहीं किया गया. सबसे अहम पहलू यह है कि उच्च न्यायालय पटना द्वारा भी अविलंब कार्य पूर्ण करने का आदेश जारी किया गया था. लेकिन अभियंता एवं संवेदक द्वारा न्यायालय के आदेश को भी नजर अंदाज कर कार्य पूर्ण नहीं किया गया.इस वजह से वहां के लोग आठ वर्षों से जर्जर सड़क पर आवागमन के लिए विवश हैं.
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पिपरा प्रखंड के दो स्थानों पर बननी थी सड़क
लोक शिकायत निवारण के तहत सुनवाई करते हुए आयुक्त ने सुनाया निर्णय
पूर्व में सरकार के आदेश पर दोषी अभियंता हुए निलंबित, प्राथमिकी दर्ज
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