अभ्यास से परमात्म की अनुभूति : कंचन
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :14 Nov 2016 6:11 AM
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आयोजन . एक दिवसीय रामचरित मानस गोष्ठी में उमड़े शहरवासी, सुना प्रवचन प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाव्धान में स्थानीय गांधी मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के आध्यात्मिक रहस्य कार्यक्रम में पांचवें दिन रविवार को कंचन दीदी ने कथा का वाचन किया. सुपौल : प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाव्धान […]
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आयोजन . एक दिवसीय रामचरित मानस गोष्ठी में उमड़े शहरवासी, सुना प्रवचन
प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाव्धान में स्थानीय गांधी मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के आध्यात्मिक रहस्य कार्यक्रम में पांचवें दिन रविवार को कंचन दीदी ने कथा का वाचन किया.
सुपौल : प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाव्धान में स्थानीय गांधी मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के आध्यात्मिक रहस्य कार्यक्रम में पांचवें दिन रविवार को कंचन दीदी ने कथा का वाचन किया. इस दौरान कंचन दीदी ने आत्मा व शरीर के रहस्य की विवेचना की. उन्होंने कहा कि इस कलयुगी दुनिया में मनुष्य की आत्मा स्वयं बुरे कर्मों के कारण अपने ही बंधनों में बंध जाती है. लोग आत्मा के बजाय शरीर को ही कर्ता मान लेते हैं. उन्होंने कहा कि मैं के बंधन से लोगों को निकलना होगा तथा स्वयं के संकल्पों पर ध्यान देना होगा. मनुष्य आत्मा अनवरत अभ्यास करती है. तब जाकर उन्हें परमात्म शक्ति की अनुभूति होती है, जिसे हम राजयोग भी कहते हैं. उन्होंने बताया कि कर्मों का आधार ही संकल्प है. और राजयोग की विधि से कर्मों में कुशलता आती है.
कंचन दीदी ने कहा कि परमात्म ज्ञान के अनुसार पवित्रता ही पात्रता है. काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार को त्याग कर ही व्यक्ति इसका पात्र हो सकता है. उन्होंने बताया कि काम विकार से हमारा ज्ञान ढंका रहता है. कामी व्यक्ति की बुद्धि में ज्ञान का मर्म नहीं बैठ सकता. इससे उनके अनुभूति की संस्मरण शक्ति समाप्त हो जाती है और यही उनके दुखों का मुख्य कारण बन जाता है. उन्होंने बताया कि सभी मनुष्य आत्मा, परमात्मा की संतान हैं. आत्माओं में सात गुण होते हैं. इसमें ज्ञान, पवित्रता, शांति, प्रेम, सुख, आनंद और शक्ति शामिल है. जिस मनुष्य के आत्माओं में इसकी अनुभूति होती है, वे ही परमात्मा के नूर होते हैं. उन्होंने बताया कि परमात्म ज्ञान से ही सच्चा अध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है. जो आत्माएं स्वयं को नियंत्रित कर लेती है. वही विश्व के लिए कल्याणकारी होता है. बताया कि कलयुग का समय अब निकट आ गया है. जहां महाविनाश होना निश्चित है और सतयुग का आगमन संभव हो पायेगा. मौके पर संस्था की मुख्य संयोजिका बीके सालिनी बहन ने कहा कि जो मनुष्य आत्मा इस विलक्षण भागवत कथा का नियमित रूप से रसपान करेंगे, उन्हें 21 जन्मों की खुशी व आनंद प्राप्ति के साथ ही निरोगी काया हासिल होगी. कार्यक्रम को सफल बनाने में ऋषि भाई, विभा बहन, भारती बहन, शंकर भाई, सत्य नारायण भाई , राधे भाई, डॉ दीपिका बहन, सुनीति बहन, बबीता बहन, ललिता माता, कंचन बहन, विवेका भाई, मुकेश भाई, रास बिहारी भाई, ललन भाई आदि योगदान दे रहे हैं. संस्था द्वारा प्रात: काल में तनाव मुक्ति मेडिटेशन शिविर का भी आयोजन किया गया है.
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