जुगाड़ टेक्नोलॉजी के सहारे चल रहा सदर अस्पताल (प्रभात पड़ताल)

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सुपौल : सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा में सुधार के भले ही लाख दावे किये जा रहे हों, लेकिन जिले में स्वास्थ्य सेवा की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. सही मायनों में कहा जाय तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था जुगाड़ टेक्नोलॉजी के सहारे चल रही है. जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति […]

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सुपौल : सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा में सुधार के भले ही लाख दावे किये जा रहे हों, लेकिन जिले में स्वास्थ्य सेवा की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. सही मायनों में कहा जाय तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था जुगाड़ टेक्नोलॉजी के सहारे चल रही है.

जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति काफी चिंताजनक है.अधिकतर पीएचसी व एपीएचसी चिकित्सक व कर्मियों के अभाव से जूझ रहा है. नतीजतन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अपेक्षित स्वास्थ्य सेवा का लाभ आज भी मयस्सर नहीं हो पा रहा है.यही वजह है कि छोटी-मोटी बीमारी की स्थिति में भी ग्रामीण क्षेत्र के रोगियों को इलाज हेतु सदर अस्पताल का रुख करना पड़ता है.

जबकि विडंबना यह है कि शहरी क्षेत्र के अस्पतालों की स्थिति भी गंभीर है.चिकित्सक की कमी से जूझ रहा सदर अस्पताल ग्रामीण क्षेत्रों की बात कौन कहे, जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल भी चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की कमी की समस्या से जूझ रहा है.यहां स्वीकृत 60 पदों के विरुद्ध मात्र 24 शिक्षक मौजूद हैं.विशेषज्ञ चिकित्सकों का घोर अभाव है.फिजिशियन के तीन पदों में एक भी पदस्थापित नहीं हैं.एक भी नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं हैं.

तीन की जगह मात्र एक सर्जन की पदस्थापना की गयी है.जिसके कारण शल्य चिकित्सा का कार्य लगभग ठप पड़ा है.छोटे-मोटे ऑपरेशन के लिए रोगियों को या तो निजी क्लिनिकों का सहारा लेना पड़ता है.अन्यथा उन्हें अन्य बड़े शहरों में मौजूद अस्पतालों का रुख करना पड़ता है.इन सब के अलावा सबसे अहम यह है कि अधिकांश नियमित वेतनमान वाले किसी ना किसी स्वास्थ्य योजना के प्रभारी पदाधिकारी का जिम्मा संभाल रहे हैं.

ऐसे चिकित्सकों का ओपीडी में दर्शन दुर्लभ होता है.जिसका नतीजा रोगियों को भुगतना पड़ता है.नर्स व स्वास्थ्य कर्मियों का है अभाव सदर अस्पताल में नर्स के 51 पद स्वीकृत हैं.जिसके एवज में एक भी ग्रेड वन नर्स की पदस्थापना नहीं की गयी है.संविदा पर प्रतिनियुक्त 17 नर्सों के भरोसे अस्पताल में आये मरीजों की देखभाल की जाती है.ड्रेसर, ओटी सहायक जैसे अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का घोर अभाव है.स्वीकृत 92 स्वास्थ्य कर्मी की जगह मात्र 37 कर्मी कार्यरत हैं.

एक मात्र ड्रेसर के अवकाश ग्रहण के उपरांत ड्रेसर की पदस्थापना नहीं की गयी है.स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों को अपेक्षित सेवा नहीं मिल पाती है.जिससे उनमें असंतोष व्याप्त है.अस्पताल में गहन चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं है.जिसकी वजह से गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है.

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