मनोवांछित फल देती हैं वीणा की विमलेश्वरी भगवती

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सुपौल : सदर प्रखंड अंतर्गत वीणा गांव में अवस्थित माता विमलेश्वरी देवी की महिमा अपार है. कहते हैं विध्ननाशिनी विमलेश्वरी स्थान में जो भी भक्त श्रद्धा व विश्वास के साथ सिर झुकाता है. उसकी सभी मुरादें पूरी होती है. वीणा सुंदरपुर मार्ग पर अवस्थित आदि कालीन इस स्थल पर भगवती पिंड के रूप में विराजमान […]

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सुपौल : सदर प्रखंड अंतर्गत वीणा गांव में अवस्थित माता विमलेश्वरी देवी की महिमा अपार है. कहते हैं विध्ननाशिनी विमलेश्वरी स्थान में जो भी भक्त श्रद्धा व विश्वास के साथ सिर झुकाता है. उसकी सभी मुरादें पूरी होती है. वीणा सुंदरपुर मार्ग पर अवस्थित आदि कालीन इस स्थल पर भगवती पिंड के रूप में विराजमान हैं.

देवी की महिमा ही है कि उक्त स्थल पर सालों भर पूजा -अर्चना के लिये लोगों का तांता लगा रहता है एवं मनोकामना पूर्ण होने पर छाग- बली भी दी जाती है. लेकिन दशहरा के मौके पर यहां भारीभीड़ उमड़ती है. स्थानीय ग्रामीणों द्वारा भगवती स्थल के समीप एक और मंदिर का निर्माण किया गया है. जहां शारदीय नवरात्र के मौके पर मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधि विधान के साथ पूजा की जाती है. आदिकालीन है माता विमलेश्वरीविमलेश्वरी स्थान की स्थापना कब हुई,

इसका यूं तो कोई प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन मान्यता है कि माता सति के इक्यावन अंगों में से यहां किरीट( मुकुट) स्थापित हुआ था. आचार्य प्रीतम देवतीर्थ के अनुसार जगदंबा ने सृष्टि का सृजन किया और उसके संचालन हेतु उन्होंने खुद को भी सृष्टि में समाहित कर लिया. यहां माता के साथ शिव भैरव रूप में विद्यमान हंै.

मान्यताओं के मुताबिक भृगु पुत्र महर्षि शौनक ने इस सिद्ध पीठ पर वर्षों तक साधना कर जगदंबा की कृपा दृष्टि प्राप्त की थी. 12 वीं शताब्दी में वीणा गांव के संस्थापक कर्णाटवंशी नान्यदेव के वंशज राजा वीणा देव ने यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया था, मंदिर के चारों ओर सुरक्षित परकोटे एवं किले का निर्माण भी कराया गया था. लेकिन जनश्रुतियों के मुताबिक 17 वीं सदी में काला पहाड़ नामक मलेक्ष ने बंगाल एवं मिथिला के कई तीर्थ स्थलों को नष्ट -भ्रष्ट कर दिया था.

जिसमें यह महादेवी मंदिर भी शामिल है. कालान्तर में कोसी की विमिषिका ने बांकी कसर पूरी कर दी. प्राचीन मंदिर का ध्वंसावशेष जमीन के नीचे दब गया. बाद में ग्रामीणों द्वारा प्रतिमा जमीन से निकाल कर उसे मृतिका पिंड पर रख कर उसकी पूजा किया जाने लगा और एक मंदिर भी बना दिया गया. समय के साथ बोलचाल में इस स्थल को बिलेश्वरी स्थान कहा जाने लगा, जो विमलेश्वरी स्थान का ही अपभ्रंश माना जाता है. नवरात्र में बढ़ती है रौनक शारदीय नवरात्र के अवसर पर शक्ति पीठ के समीप अवस्थित मंदिर में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित कर पूजा -अर्चना की जाती है.

दशहरा के मौके पर यहां मेले का भी आयोजन किया गया है. पूजा समिति के अध्यक्ष हरिनाथ झा, सचिव शंभु नाथ मिश्र ने बताया कि पूजा स्थल पर नवरात्र के मौके पर गिरी जी महाराज द्वारा नित दिन प्रवचन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि नवमी के दिन बाहर से आये कलाकारों द्वारा मैया जागरण का आयोजन होगा.जबकि विजया दशमी के दिन रावण बध किया जायेगा. कार्यक्रम की सफलता में स्थानीय युवाओं का भरपूर सहयोग मिल रहा है.

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