श्रद्धालुओं ने की स्कंदमाता की पूजा

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श्रद्धालुओं ने की स्कंदमाता की पूजा फोटो- 18,19कैप्सन – प्रवचन देते वाचक व उपस्थित श्रद्धालुप्रतिनिधि, सुपौलआश्विन शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ नवरात्र के अवसर पर पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा- अर्चना की. माता की आराधना को लेकर शनिवार को सुबह से ही मंदिरों में काफी भीड़ लगी रही. मां […]

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श्रद्धालुओं ने की स्कंदमाता की पूजा फोटो- 18,19कैप्सन – प्रवचन देते वाचक व उपस्थित श्रद्धालुप्रतिनिधि, सुपौलआश्विन शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ नवरात्र के अवसर पर पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा- अर्चना की. माता की आराधना को लेकर शनिवार को सुबह से ही मंदिरों में काफी भीड़ लगी रही. मां स्कंदमाता के स्वरूपों की पूजा के बाद भक्तजनों ने मंत्रोच्चार कर मैया के जयकारे लगाये. इससे मंदिर परिसर सहित संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया. परंपरा के अनुसार सप्तमी तिथि को मंदिर में स्थापित की गयी मां दुर्गा की प्रतिमा का पट खोला जायेगा. इसे लेकर कुशल कारीगर प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप देने में जुटे हैं. साथ ही विभिन्न पूजा समिति के सदस्यों द्वारा मंदिर परिसर का आकर्षक तरीके से सजावट कराया जा रहा है.राम कथा का आयोजन नवरात्र के मौके पर मुख्यालय स्थित स्थानीय गांधी मैदान परिसर के सार्वजनिक दुर्गा मंदिर परिसर में शनिवार को राम कथा प्रवचन का आयोजन कराया गया है. हिमाचल प्रदेश से आये पूज्य विरेश मैत्रेय ने अपने संगीतमय प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डूबोते रहे. इस दौरान भक्त जनों द्वारा दर्जनों बार मैया का जय कारा लगाया गया. माता के स्वरूपों की आराधना कोसी क्षेत्र में दशहरा त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा नौ दिनों तक उपवास रख कर माता के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है. साधकों के द्वारा इस त्योहार के दौरान मांसाहारी, मदिरा व मनोरंजन के साधन को जगह नहीं दी जाती है. यहां तक कि पुरुष श्रद्धालु बाल – दाढ़ी भी बनाने से परहेज करते हैं. वहीं महिलाओं द्वारा साज- शृंगार का भी त्याग किया जाता है. साथ ही आरामदायक बिछावन को छोड़ जमीन पर सोते हैं. सदियों से रही है उपवास की परंपरादशहरा के मौके पर सदियों उपवास रख कर माता की आराधना किये जाने की परंपरा चली आ रही है. माना जाता है कि उपवास से आत्मा व शरीर के बीच मधुर संबंध स्थापित होता है. उपवास के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा सभी जरूरत को नकार सिर्फ आवश्यक संसाधन का ही उपयोग किया जाता है. इससे श्रद्धालुओं को आराधना व ध्यान लगाने में आसानी होती है. साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण में उपवास रखने से पाचन तंत्र को भी फायदा पहुंचता है और शरीर को आराम मिलता है.

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