सूबे के सभी सीडीपीओ को मिल रही है एसएमएस पर धमकी
सुपौल: सीडीपीओ-डीपीओ-डीएम गोपनीय शाखा-कथित अंजनी कुमार प्रकरण वक्त बीतने के साथ उलझता नजर आ रहा है. मुख्य आरोपी डीपीओ रमेश कुमार ओझा राज्य सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए अभी भी जिले में नीतिगत निर्णय ले रहे हैं तो दूसरी ओर कथित रूप से मुख्यमंत्री आवास से जुड़ा शख्स अंजनी कुमार आज भी राज्य […]
सुपौल: सीडीपीओ-डीपीओ-डीएम गोपनीय शाखा-कथित अंजनी कुमार प्रकरण वक्त बीतने के साथ उलझता नजर आ रहा है. मुख्य आरोपी डीपीओ रमेश कुमार ओझा राज्य सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए अभी भी जिले में नीतिगत निर्णय ले रहे हैं तो दूसरी ओर कथित रूप से मुख्यमंत्री आवास से जुड़ा शख्स अंजनी कुमार आज भी राज्य भर के सीडीपीओ को धमकी भरा संदेश भेज रहा है. पूरे प्रकरण की वैज्ञानिक जांच कर रही पुलिस की साख दांव पर लगी है. क्योंकि पूरा मामला हाई प्रोफाइल है.
निशाने पर कई सीडीपीओ
धमकी 9472366632 का धारक कथित रूप से मुख्यमंत्री आवास से जुड़ा अंजनी कुमार भले हीं विगत दो वर्षो से मोबाइल के माध्यम से भयादोहन का नेटवर्क संचालित कर रहा हो, लेकिन सात मई से लेकर अब तक जिस रफ्तार से उसने अपने मंसूबे को अंजाम दिया है वह हैरत अंगेज है. प्रभात पड़ताल से स्पष्ट हुआ है कि धमकी नंबर के निशाने पर राज्य की सैकड़ों सीडीपीओ है. वहीं उक्त धमकी नंबर से कई आइसीडीएस डीपीओ की भी बातचीत होती रही है. कथित अंजनी कुमार ने राघोपुर सीडीपीओ के अलावा किसनपुर, बसंतपुर, प्रतापगंज,छातापुर, मधेपुरा , मुरलीगंज, गम्हरिया, पतरघट समेत अन्य जिले के सीडीपीओ का भी भयादोहन किया है. जानकारी के अनुसार, अमूमन उन्हीं सीडीपीओ को धमकी नंबर से कॉल आता रहा है, जिन्होंने अपने आलाधिकारी के खिलाफ जाने की हिम्मत दिखायी है.
धमकी नेटवर्क में शामिल है कई नंबर
दिलचस्प यह है कि लंबे समय से कभी मुख्यमंत्री आवास के नाम पर तो कभी विभागीय मंत्री के सचिव के नाम पर धमकी नेटवर्क संचालित है. लेकिन किसी ने राघोपुर सीडीपीओ से पहले बिल्ली के गले में घंटी बांधने की जुर्रत नहीं की. प्रभात पड़ताल से स्पष्ट है कि इस धमकी नेटवर्क में कई लोग शामिल हैं, जिसमें आइसीडीएस से जुड़े लोग भी मौजूद हैं. आशीष कुमार, डॉ बोस जैसे नाम से निर्गत लगभग एक दर्जन मोबाइल व लैंड लाइन धारक इस गिरोह में शामिल हैं, जिस पर पुलिस की भी निगाहें हैं. वहीं कई सीडीपीओ ऐसी हैं जिनसे कथित अंजनी कुमार की लंबी बातचीत हुई है. जाहिर है पुलिस की जांच के दायरे में सभी लोग शामिल हैं.
डीएम व डीपीओ से हुई थी लंबी बातचीत
धमकी प्रकरण में डीएम की गोपनीय शाखा की चुप्पी जहां शक को गहरा रही है, वहीं डीपीओ ओझा भी सफेद झूठ बोल रहे हैं. प्रभात पड़ताल के अनुसार, सात मई को सबसे पहले कथित अंजनी कुमार की बातचीत डीएम की गोपनीय शाखा के 06473223111 से हुई थी. यह बातचीत काफी लंबी थी. इतनी लंबी बातचीत किसी अनजान व्यक्ति से सामान्य स्थिति में संभव नहीं है. इतना हीं नहीं डीपीओ ने खुद पहले अंजनी कुमार से बातचीत की और फिर सीडीपीओ को वह नंबर दिया. हैरानी की बात यह है कि डीपीओ श्री ओझा ने उसी दिन एक घंटे के बाद दोबारा अंजनी कुमार से बातचीत किया. यह बातचीत इतनी लंबी है कि इससे साजिश की बू आती है. इसके अलावा गोपनीय शाखा से अंजनी कुमार की आठ मई को भी बातचीत हुई है जो गोपनीय शाखा में किसी सूत्रधार के मौजूद होने की ओर इशारा करता है.
पुलिस जांच पर टिकी हैं निगाहें
धमकी मामले में एक सप्ताह पूर्व राघोपुर थाना कांड संख्या 82/15 दर्ज हुआ है. श्री ओझा आइपीसी की धारा 384, 385, 34 व एससी/एसएसटी एक्ट के तहत आरोपी बने हैं. खास यह है कि यह मुकदमा जांचोपरांत दर्ज हुआ है. श्री ओझा का स्थानांतरण 23 फरवरी को हीं हो चुका है. बावजूद श्री ओझा जिले में विराजमान हैं, जिसकी वजह संभवत: यह है कि उन्हें रसूखदार लोगों का संरक्षण प्राप्त है. आम लोगों के गले यह बात नहीं उतर पा रही है कि डीएम की गोपनीय शाखा से लेकर डीपीओ ओझा तक इतनी आसानी से धमकी नेटवर्क के शिकार हो जायेंगे. बड़ा सवाल यह है कि डीएम की गोपनीय शाखा में मुख्यमंत्री आवास से जुड़े कॉल को क्या इतना सतही तौर पर निबटाया जाता है. सवाल कई हैं और सारा जवाब पुलिस के अनुसंधान में निहित है. देखना दिलचस्प होगा कि इस बार धमकी नेटवर्क का और नेटवर्क से जुड़े सफेद पोशों का खुलासा हो पाता है या फिर इस अनुसंधान की भी वहीं गति होती है जो अक्सर हाई प्रोफाइल मामले में होती आ रही है.
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