अधिकार व कर्तव्य की लड़ाई लड़ने के लिए संबंधित कर्मी आंदोलन करने पर उतारू

सुपौल : पदाधिकारियों का दायित्व विभागीय नियमावली का स्वविवेक के साथ निष्ठा पूर्वक व्यवस्था को सुधारने के लिए है. लेकिन जब अधिकारी ही मनमानी पर उतर जाय तो ऐसी स्थिति में अधिकार व कर्तव्य की लड़ाई लड़ने के लिए संबंधित कर्मी आंदोलन करने पर उतारू होते रहे हैं. जिसे लोकतंत्र में भी जायज माना गया […]
सुपौल : पदाधिकारियों का दायित्व विभागीय नियमावली का स्वविवेक के साथ निष्ठा पूर्वक व्यवस्था को सुधारने के लिए है. लेकिन जब अधिकारी ही मनमानी पर उतर जाय तो ऐसी स्थिति में अधिकार व कर्तव्य की लड़ाई लड़ने के लिए संबंधित कर्मी आंदोलन करने पर उतारू होते रहे हैं. जिसे लोकतंत्र में भी जायज माना गया है. हालांकि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में शिक्षकों द्वारा निष्ठापूर्वक कर्तव्य का निर्वहन किया जा रहा है. लेकिन पदाधिकारियों का नजरिया व्यवस्था के प्रतिकूल रहने के कारण शिक्षकों को अपने हक व हकूक के लिए आंदोलन पर उतरने के लिए विवश होना पड़ा.
बावजूद इसके पदाधिकारी अपनी गलती को मानने के लिए तैयार नहीं है. कुछ ऐसी ही स्थिति जिले की शिक्षा व्यवस्था की बनी हुई है. जिसका तरोताजा उदाहरण गुरुवार को जिला शिक्षा कार्यालय परिसर में देखी जा रही है. 12 सूत्री मांगों लेकर बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला इकाई का आमरण अनशन गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा. वहीं आमरण अनशन पर डटे आधा दर्जन सदस्यों की मांगों पर जहां शिक्षा महकमाओं के पदाधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गयी. वहीं 24 घंटे बीत जाने के बाद भी चिकित्सीय जांच का कार्य नहीं कराया गया. जिस कारण मानसिक प्रताड़ना का शिकार कई सदस्यों के शारीरिक स्थिति पर प्रतिकूल असर देखा गया. अनशन पर भूखे-प्यासे डटे शिक्षकों को संघ के सदस्यों द्वारा दिन भर हौसला अफजाई करते देखा गया.
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