अधिकार व कर्तव्य की लड़ाई लड़ने के लिए संबंधित कर्मी आंदोलन करने पर उतारू

Published at :18 May 2018 6:05 AM (IST)
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अधिकार व कर्तव्य की लड़ाई लड़ने के लिए संबंधित कर्मी आंदोलन करने पर उतारू

सुपौल : पदाधिकारियों का दायित्व विभागीय नियमावली का स्वविवेक के साथ निष्ठा पूर्वक व्यवस्था को सुधारने के लिए है. लेकिन जब अधिकारी ही मनमानी पर उतर जाय तो ऐसी स्थिति में अधिकार व कर्तव्य की लड़ाई लड़ने के लिए संबंधित कर्मी आंदोलन करने पर उतारू होते रहे हैं. जिसे लोकतंत्र में भी जायज माना गया […]

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सुपौल : पदाधिकारियों का दायित्व विभागीय नियमावली का स्वविवेक के साथ निष्ठा पूर्वक व्यवस्था को सुधारने के लिए है. लेकिन जब अधिकारी ही मनमानी पर उतर जाय तो ऐसी स्थिति में अधिकार व कर्तव्य की लड़ाई लड़ने के लिए संबंधित कर्मी आंदोलन करने पर उतारू होते रहे हैं. जिसे लोकतंत्र में भी जायज माना गया है. हालांकि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में शिक्षकों द्वारा निष्ठापूर्वक कर्तव्य का निर्वहन किया जा रहा है. लेकिन पदाधिकारियों का नजरिया व्यवस्था के प्रतिकूल रहने के कारण शिक्षकों को अपने हक व हकूक के लिए आंदोलन पर उतरने के लिए विवश होना पड़ा.

बावजूद इसके पदाधिकारी अपनी गलती को मानने के लिए तैयार नहीं है. कुछ ऐसी ही स्थिति जिले की शिक्षा व्यवस्था की बनी हुई है. जिसका तरोताजा उदाहरण गुरुवार को जिला शिक्षा कार्यालय परिसर में देखी जा रही है. 12 सूत्री मांगों लेकर बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला इकाई का आमरण अनशन गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा. वहीं आमरण अनशन पर डटे आधा दर्जन सदस्यों की मांगों पर जहां शिक्षा महकमाओं के पदाधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गयी. वहीं 24 घंटे बीत जाने के बाद भी चिकित्सीय जांच का कार्य नहीं कराया गया. जिस कारण मानसिक प्रताड़ना का शिकार कई सदस्यों के शारीरिक स्थिति पर प्रतिकूल असर देखा गया. अनशन पर भूखे-प्यासे डटे शिक्षकों को संघ के सदस्यों द्वारा दिन भर हौसला अफजाई करते देखा गया.

अवैध वसूली की मंशा पाले हैं पदाधिकारी
जिलाध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि सरायगढ़-भपटियाही के 12 शिक्षक को चार वर्षों से सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा अवैध वसूली की मंशा से वेतन विपत्र जिला को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. जिस वजह से शिक्षकों की हालत दयनीय हो गया. अनशनकारी जिला श्री सिंह के साथ सदर प्रखंड अध्यक्ष नीरज कुमार सिंह, मरौना प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुमार रजक, छातापुर प्रखंड अध्यक्ष गुणानंद सिहं, त्रिवेणीगंज प्रतिनिधि सुजीत यादव, किसनपुर प्रतिनिधि ललन कुमार भी अनशन पर बैठे हैं. अनशन कार्यक्रम की सफलता को लेकर संघ के जिला उपाध्यक्ष रोशन कुमार, श्रवण कुमार, भूपेंद्र यादव, राकेश रंजन, गजेंद्र कुमार, कृष्ण मुरारी, प्रेम पाठक, शंभु कुमार, संजीत मंडल, सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा अपेक्षित योगदान दिया जा रहा है.
डीपीओ की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
शिक्षकों के आमरण अनशन के बाबत शिक्षाविदों ने बताया कि शिक्षकों के 12 सूत्री मांगों में सभी मामले डीपीओ स्थापना व एसएसए से जुड़ा है. साथ ही उक्त पद को काफी समय से डीपीओ अमरभूषण संभाले हुए हैं. बताया कि डीपीओ अमरभूषण द्वारा संचिकाओं के निष्पादन के प्रति रुचि नहीं ली जा रही है. कई फाइलों को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जा रहा है. साथ ही अपने कार्यों के निष्पादन कराने हेतु प्रतिदिन शिक्षकों को बेवजह कार्यालय का चक्कर काटने पर विवश होना पड़ रहा है. शिक्षाविदों ने यह भी बताया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा डीपीओ स्थापना के कार्यों का अनुश्रवण नहीं किया जा रहा है कि एक माह में रुटिन वर्क के अलावे कितने लंबित फाइलों का निष्पादन किया गया. जिस कारण उनके द्वारा मनमाने तरीके से कार्य को अंजाम दिया जा रहा है.
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