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फोर्ड हॉस्पिटल में हुआ सफल कार्डियक एब्लेशन, चार मरीजों को मिली तेज धड़कन से राहत 

28 Sep, 2025 5:07 pm
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फोर्ड हॉस्पिटल पटना में एक ही दिन चार मरीज की दिल की अनियमित धड़कन का सफल इलाज रेडियो-फ्रीक्वेंसी एब्लेशन के जरिए किया गया. इसके बारे में जानकारी देते हुए वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बी. बी. भारती ने बताया, कि कार्डियक एब्लेशन ऐसी स्थिति है जिसमें हार्ट रेट बहुत तेज हो जाता है, मरीज थक जाते हैं, बीपी गिर सकती है और बेहोशी तक हो सकती है.

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फोर्ड हॉस्पिटल में एक ही दिन चार मरीज की दिल की अनियमित धड़कन (Arrhythmia) का सफल इलाज रेडियो-फ्रीक्वेंसी एब्लेशन के जरिए किया गया. नगरनौसा की 61 वर्षीय नीरजा देवी, कैमूर के 28 वर्षीय नंद बाबू, गयाजी की रामा और भोजपुर की 36 वर्षीय सीता देवी ( सभी बदले हुए नाम) लंबे समय से बार-बार तेज धड़कन की शिकायत से परेशान थे. जांच में उनके हृदय की रिद्म में गड़बड़ी पाई गई. डॉक्टरों की  टीम ने EPS (Electrophysiology study )  के बाद एब्लेशन कर समस्या का स्थायी समाधान किया. चारों मरीज स्वस्थ हैं और उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है.

फोर्ड हॉस्पिटल के डायरेक्टर ने दी अहम जानकारी

वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बी. बी. भारती ने बताया, “ऐसी स्थितियों में हार्ट रेट बहुत तेज हो जाता है, मरीज थक जाते हैं, बीपी गिर सकती है और बेहोशी तक हो सकती है. कारण अक्सर दिल के अंदर किसी एक स्थान (फोकस) से गलत विद्युत-सिग्नल बनना होता है, जो बार-बार तेज धड़कन ट्रिगर करता है.  पहले उस फोकस की सही जगह का पता लगाया जाता है और रेडियो-फ्रीक्वेंसी एब्लेशन से उसे ‘जलाकर’ समाप्त कर दिया जाता है ताकि गलत सिग्नल बनना बंद हो जाए.”

डॉ. भारती ने आगे बताया, “यह ओपन सर्जरी नहीं है. केथेटर/वायर के जरिए इसे नस से किया जाता है. प्रत्येक मरीज के इलाज में इस प्रक्रिया से लगभग 1 घंटे लगे. उन्होंने बताया कि यह इलाज सामान्यतः बहुत सुरक्षित माना जाता है, जिसकी सफलता दर करीब 90% के आसपास है. कई मरीज़ उसी दिन या जल्द ही घर जा सकते हैं. 

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एब्लेशन का स्थायी इलाज है संभव 

कार्डियक एब्लेशन का प्रमुख कारण दिल के किसी छोटे हिस्से से गलत विद्युत सिग्नल का  बनना है. इलाज के तहत EPS से फोकस खोजकर रेडियो-फ्रीक्वेंसी से उसे समाप्त किया जाता है.  डॉ. भारती ने कहा कि ऐसे किसी भी लक्षण (बार-बार तेज धड़कन, चक्कर आना, थकावट, साँस फूलना) पर तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क कर जाँच करानी चाहिए.

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