गुठनी. राज्य सरकार के तमाम आदेश के बावजूद गुठनी के कई जगहो पर अवैध खनन जारी है. प्रखंड मुख्यालय के श्रीकरपुर गांव के समीप ठेकदार द्वारा गोगरा तटबंध के समीप से मिट्टी खनन करवाने का मामला सामने आया है. मामला सामने तब आया जब ग्रामीणों के द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अधिकारियों, समाजसेवी, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है. आरोप लगाया कि गोगरा तटबंध के समीप से मिट्टी खनन तेजी से हो रहा है. जिससे आने वाले बाढ़ के दिनों में कई गांवों का नामोनिशान मिट जाएगा. वहीं नदी का रुख ग्रामीणों क्षेत्रों की तरफ हो सकता है. नदी का रुख ग्रामीण इलाकों में होने से घर, स्कूल, खेत, बिल्डिंग का भी नामोनिशान खतरे में पड़ जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि मिट्टी व बालू को कारोबारी रात के समय ट्रको पर जेसीबी से भर कर ले जाते है. मिट्टी और बालू के खनन से जहां लोगो को काफी असुविधा होती है. वही बरसात के महीनों में नदी में बाढ़ आने से कटाव का खतरा और भी बढ़ जाता है. सीओ डॉ विकास कुमार ने बताया कि सूचना मिलने के बाद खनन और जल संसाधन विभाग द्वारा भी जांच किया गया. इस मामले में गंभीरता से जांच पड़ताल किया जा रहा है. सीओ डॉ विकास कुमार, फ्लड एसडीओ अजमत अली, खान निरीक्षक मोहम्मद इरफान, थानाध्यक्ष मनीष कुमार समेत अन्य पदाधिकारियों ने निरीक्षण किया. बाढ़ के समय तटबंधों को नुकसान पहुंचने की आशंका- थाना क्षेत्र के कई जगहों पर अवैध खनन से जहां आम आदमी को अपने जीवन व परिवार को लेकर चिंता है. वहीं खनन विभाग पूरी मामले में मूक दर्शक बना हुआ है. स्थानीय ग्रामीणों के कई बार शिकायत के बाद भी इस पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है. लोगों का कहना है कि 2017 में इस तरह के खनन को लेकर स्थानीय थाने व सीओ को आवेदन देने पर कई लोगो के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था. और अवैध खनन पूरी तरह बंद हुआ. स्थानीय लोगो ने कहा कि अगर इस कारोबार को जल्द बंद नहीं किया गया तो हम सभी ग्रामीण मिल कर इसकी शिकायत डीएम व एसपी से करेंगे. खनन माफियाओं को इससे होती है मोटी कमाई- थाना क्षेत्र में चल रहे खनन पर भले ही खनन विभाग चुप्पी साधे हुए हैं. लेकिन इससे जुड़े कारोबारी नदी से बालू खनन कर मोटी रकम कमाते हैं. जबकि लोगो के जरूरतों के हिसाब से वह उनसे सौदा करते हैं. जिनमें ट्राली से करीब आठ सौ और बड़ी ट्राली से बारह सौ रुपए लेते हैं. खनन पदाधिकारी रागनी कुमारी ने बताया कि इसकी सूचना मिलने के बाद विभाग द्वारा जांच किया जाएगा.इसकी जानकारी मुझे नहीं है.
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