सीवान. जिले में साढ़े तीन दशक पूर्व बंद हो गयी दो सरकारी मिलों के कर्मियों के बकाये के भुगतान की उम्मीद जगी है. ऐसे कर्मियों से बकाया राशि के लिये आवश्यक पत्रावली जमा करने काे कहा गया है, जिसको लेकर दिसंबर माह के अंत तक समस्त कागजात जमा करने होंगे. साढ़े तीन दशक पूर्व तक जिले में बिहार राज्य चीनी निगम लिमिटेड की दो चीनी मिले चालू हालत में थी, जिसमें रेनुआ में न्यू सूगर चीनी मिल व हरदिया मोड़ के समीप एसकेजी सूगर मिल शामिल रही. ये दो मिलें वर्ष 1990 के बाद तीन वर्षों के अंदर बंद हो गयी. अंतिम समय तक 1243 कर्मचारी तैनात थे. हाल के वर्षों में सरकार ने इन कर्मियों को बकाये का भुगतान करने के लिये 25 करोड़ रुपये जारी किया, जिनमें से 550 से अधिक कर्मियों को 13 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. ऐसे में सरकारी खजाने में 12 करोड़ रुपये अब भी भुगतान के लिए पड़े हुए हैं.
मौत के बाद वारिस को होना है भुगतान
नियमानुसार मिल में कार्यरत रहे कर्मियों में स्थायी व सिजनल दोनों के बीच बकाये का भुगतान किया जाना है. मृत कर्मियों के वारिस को धनराशि का भुगतान करना है. इसमें इपीएफ की राशि भी शामिल है. इसके लिए एनओसी दाखिल करना होगा.विभाग के मुताबिक पैसे पाने के लिये आवेदन पत्र के अलावा शपथ पत्र, बैंक पासबुक की छायाप्रति व कर्मी होने की गवाही देना अनिवार्य है. विभाग का कहना है कि कर्मियों को पत्र भी भेजे जा रहे हैं, पर अधिकतर पत्र लौट जा रहे हैं. इसके चलते भी अड़चन आ रही है.
क्या कहते हैं अधिकारी
कर्मियों के भुगतान को लेकर पहले भी प्रक्रिया चली थी, जिसका सेवानिवृत्तकर्मियों को लाभ मिला था. एक बार फिर माह के अंत तक ऐसे सेवानिवृत्तकर्मियों को भुगतान पाने के लिये आवेदन मांगे गये हैं. जिनके मिलने के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश के मुताबिक बकाये का भुगतान किया जायेगा.कुमार कानन
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