सीवान में ग्रामीण कार्य विभाग का बड़ा ऐक्शन: जाली सर्टिफिकेट लगाकर ठेका लेने वाली कंपनी 10 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 08 Jun 2026 10:03 PM

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सांकेतिक तस्वीर

Siwan Tender Fraud News: ग्रामीण कार्य विभाग सीवान-01 ने जाली अनुभव प्रमाण-पत्र पेश करने पर गोपालगंज की अवनीश कंस्ट्रक्शन को 10 वर्षों के लिए काली सूची में डाला. पचरूखी की 27 ग्रामीण सड़कों की निविदा में हुआ था फर्जीवाड़ा. एफआईआर पहले ही दर्ज. पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट.

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Siwan Tender Fraud News(विवेक कुमार सिंह): सीवान जिले में सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पारदर्शिता व ईमानदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ग्रामीण कार्य विभाग ने एक बहुत बड़ी और नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की है. विभाग ने निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में जालसाजी करने और जाली दस्तावेज सौंपकर सरकार को गुमराह करने के गंभीर आरोप में एक नामी निर्माण एजेंसी को तत्काल प्रभाव से अगले 10 वर्षों के लिए काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया है. विभाग के इस हंटर से फर्जी दस्तावेजों के सहारे मलाई काटने वाले ठेकेदारों और सिंडिकेट के बीच हड़कंप मच गया है.

गोपालगंज कार्य प्रमंडल-2 का लगाया था जाली सर्टिफिकेट, जांच में खुली पोल

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सीवान-01 के अधीन निविदा संख्या-145960 से जुड़ा हुआ है. इस टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए गोपालगंज की निर्माण एजेंसी ‘अवनीश कंस्ट्रक्शन’ द्वारा तकनीकी निविदा में अनुभव प्रमाण-पत्र (एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) के रूप में कुछ कागजात जमा किए गए थे. स्क्रूटनी के दौरान जब अधिकारियों को इन कागजातों की सत्यता पर गहरा संदेह हुआ, तो इसकी विभागीय स्तर पर एक उच्च स्तरीय गोपनीय जांच कराई गई. जांच में पता चला कि एजेंसी ने गोपालगंज के ग्रामीण कार्य विभाग प्रमंडल-2 के नाम पर तैयार किया गया एक हूबहू फर्जी और अवैध अनुभव प्रमाण-पत्र लगाया था, जिसका सरकारी रिकॉर्ड में कोई वजूद ही नहीं था.

बीमारी का बहाना बनाकर मांगा समय, विभाग ने खारिज कर ठोक दिया 10 साल का बैन

फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही विभाग ने नियमों के तहत संबंधित एजेंसी के प्रोप्राइटर से बकायदा शो-कॉज (स्पष्टीकरण) मांगकर जवाब तलब किया था. लेकिन पकड़े जाने के डर से एजेंसी ने कोई पुख्ता सबूत या वैध दस्तावेज पेश करने के बजाय बीमारी का बहाना बना दिया और मामले को लटकाने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की. ग्रामीण कार्य विभाग ने इसे पूरी तरह टालमटोल और असंतोषजनक मानते हुए खारिज कर दिया और ऑन-रिकॉर्ड मौजूद साक्ष्यों के आधार पर कड़ा फैसला लेते हुए एजेंसी पर 10 साल का लंबा प्रतिबंध लगा दिया.

पचरूखी प्रखंड की 27 सड़कों का था मामला, एक महीने पहले ही दर्ज हुई थी FIR

गौरतलब है कि सीवान के पचरूखी प्रखंड क्षेत्र में ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए लगभग 27 सड़कों के निर्माण को लेकर एक साथ बंपर निविदा जारी की गई थी. इसी महा-टेंडर को हथियाने के लिए अवनीश कंस्ट्रक्शन ने यह पूरा जाल बुना था. दस्तावेज जाली पाए जाने के बाद ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल-01 के कार्यपालक अभियंता की ओर से करीब एक महीने पहले ही संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ सीवान के स्थानीय थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी की नामजद एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई जा चुकी है.

विभागीय उच्चाधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि बिहार सरकार की विकास योजनाओं में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, जालसाजी, कोताही या अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन रत्ती भर भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. विभाग ने भविष्य के लिए भी सभी कार्य प्रमंडलों को टेंडर दस्तावेजों की सतत और बारीक निगरानी करने के निर्देश जारी किए हैं. इस ऐतिहासिक कार्रवाई से साफ संदेश चला गया है कि ईमानदारी से काम करने वाले संवेदकों का स्वागत होगा, लेकिन शार्टकट और फर्जीवाड़े से सरकारी खजाना लूटने की कोशिश करने वालों का ठिकाना सीधे जेल और ब्लैकलिस्ट की श्रेणी में होगा.

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