कोरोना का असर: बदले हालात, तो बदल दिया कारोबार

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 12 Apr 2020 2:26 AM

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बड़हरिया : लॉकडाउन से बहुतों की रोजी-रोटी छीन चुकी है. जिनकी पहले चाट-पकौड़े या चाय की दुकान थी या पान की गुमटी थी या ठेले पर घूमाकर जिलेबी बेचने का कारोबार था या होटल था. लॉकडाउन के बाद ऐसे तमाम कारोबार बंद हो चुकी हैं. मूल काम-धंधे बंद होते ही इन कारोबारियों ने अपने पहले […]

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बड़हरिया : लॉकडाउन से बहुतों की रोजी-रोटी छीन चुकी है. जिनकी पहले चाट-पकौड़े या चाय की दुकान थी या पान की गुमटी थी या ठेले पर घूमाकर जिलेबी बेचने का कारोबार था या होटल था. लॉकडाउन के बाद ऐसे तमाम कारोबार बंद हो चुकी हैं. मूल काम-धंधे बंद होते ही इन कारोबारियों ने अपने पहले का व्यवसाय बदलकर दूसरा कारोबार कर लिया है. ताकि इनकी रोजी-रोटी चलती रहे. इनमें अधिकांश ऐसे हैं जो रोज कमाते थे व रोज खाते थे. इन्होंने जब देखा कि खाने के लाले पड़ जायेंगे, तो इन्होंने अपना कारोबार ही बदल दिया. इनमें से अधिकांश लोगों ने सब्जी बेचना शुरू कर दिया है. पूरे प्रखंड में ऐसे लोगों की तादाद सैकड़ों में है. बहरहाल, बड़हरिया बाजार के पान के दुकानदार बृजमोहन ने हालात को भांपते हुए पान की गुमटी के आगे सब्जी की दुकान खोल ली है. वहीं होटल आदित्य के नाम से भोजनालय चला रहे जितेंद्र कुमार ने भोजन बनाने की जगह सब्जी का कारोबार कर लिया है

चाट की दुकान वाले श्रीराम साह ने भी बड़हरिया बाजार में सब्जी की दुकान खोल रखी है. बड़हरिया बाजार के रंजन कुमार होटल की जगह सब्जी की दुकान लगाने लगे हैं. पुरानी बाजार बड़हरिया के दिलीप कुमार की पहले चाय की दुकान थी और अब ठेला पर सब्जी बेच रहे हैं. भलुआं के भरत कुमार, जो कल तक रेडीमेड कपड़ा का कारोबार कर रहे थे, अब सब्जी की दुकान लगा रहे हैं. नवलपुर के प्रभु साह मूल धंधा छोड़कर साइकिल से सब्जी बेचने लगे हैं. इन तमाम लोगों ने हालात से समझौता कर रोजी-रोटी के नये अवसर तलाश चुके हैं. चाट के दुकानदार श्रीराम साह बताते हैं कि बड़ा परिवार हैं. बाप-बेटे मिलकर तीन दुकानें लगाते थे. लेकिन तीनों दुकानें लॉकडाउन के चलते बंद है. इनकम जीरो है व खर्च वहीं रह गया है. ऐसे में कोई कारोबार कर बच्चों का पेट पालना जरूरी है. इसलिए मैंने सब्जी का कारोबार शुरू कर दिया. इससे इतनी आमदनी हो जाती है तो बच्चों का पेट भर सके. वे कहते हैं-पापी पेट का सवाल है, कुछ तो करना होगा. श्रीराम साह को आशंका है कि कंटेंमेंट जोन के कारण यह सब्जी दुकान बंद हो गयी तो क्या होगा ?

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