अपीलीय प्राधिकार से नियोजित शिक्षकों की नौकरी दांव पर

Published by :DEEPAK MISHRA
Published at :26 Apr 2026 10:10 PM (IST)
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अपीलीय प्राधिकार से नियोजित शिक्षकों की नौकरी दांव पर

जिले में वर्ष 2006 व 2008 की रिक्ति पर अपीलीय प्राधिकार से बहाल शिक्षकों की नौकरी भी दांव पर लग गयी है. शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि वर्षों पुराने मेरिट लिस्ट के आधार पर नौकरी का दावा नहीं किया जा सकता है.

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प्रतिनिधि, सीवान. जिले में वर्ष 2006 व 2008 की रिक्ति पर अपीलीय प्राधिकार से बहाल शिक्षकों की नौकरी भी दांव पर लग गयी है. शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि वर्षों पुराने मेरिट लिस्ट के आधार पर नौकरी का दावा नहीं किया जा सकता है. हाइकोर्ट ने पंचायत एवं प्रखंड शिक्षक नियुक्ति विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि वर्षों पुरानी मेरिट लिस्ट के आधार पर नौकरी का दावा नहीं किया जा सकता. कोर्ट के इस निर्णय से अपीलीय प्राधिकार से बहाल शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे है. जिले में ऐसे शिक्षकों की संख्या दर्जनों बतायी जा रही है. जानकारों का कहना है कि वेतन की रिकवरी नहीं होगी. मामला वर्ष 2006 और 2008 की शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है. उस समय चयन सूची में शामिल कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी थी. बाद में वर्ष 2012 के पश्चात जब कुछ पद रिक्त हुए, तो अभ्यर्थियों ने जिला अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील कर नियुक्ति प्राप्त कर ली. राज्य सरकार ने इन नियुक्तियों को चुनौती दी. जिस पर राज्य अपीलीय प्राधिकरण ने नियुक्तियां रद्द करते हुए वेतन वसूली का आदेश दिया था. इसके विरुद्ध बड़ी संख्या में शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. खंडपीठ ने अपने 103 पन्नों के निर्णय के 49 वें बिंदु में नियुक्ति को गलत करार दिया है. निर्णय में कहा है कि वर्ष 2006-08 की चयन प्रक्रिया वर्ष 2010 में ही समाप्त हो चुकी थी. बाद में उत्पन्न रिक्तियों को पुरानी मेरिट सूची से भरना नियमों के विपरीत है. मेरिट लिस्ट को रिजर्व पैनल की तरह अनिश्चितकाल के लिए नहीं रखा जा सकता है कोर्ट ने यह भी माना है कि कई याचिकाकर्ताओं द्वारा 6-8 वर्षों की देरी से अपील करना उचित नहीं है. वहीं इस संबंध में विभाग के एक पदाधिकारी ने बताया कि कोर्ट का निर्णय सर्वमान्य है. अभी कोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है.

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