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आठ दिन में 64 हजार महिलाओं से किया गया संवाद

Updated at : 25 Apr 2025 9:36 PM (IST)
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आठ दिन में 64 हजार महिलाओं से किया गया संवाद

18 अप्रैल से शुरू हुए महिला संवाद में एक सप्ताह में 64 हजार महिलाओं ने भागीदारी दी है. जिला प्रशासन ने आंकड़े को ऐतिहासिक बताते हुए इसे सामाजिक चेतना का प्रतीक भी बताया है. महिला संवाद कार्यक्रम में गांव की महिलाएं अब अपने अधिकारों, योजनाओं और अपने समुदाय की जरूरतों के प्रति जागरूक होकर सरकार से सीधे संवाद कर रही हैं.

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प्रतिनिधि सीवान. 18 अप्रैल से शुरू हुए महिला संवाद में एक सप्ताह में 64 हजार महिलाओं ने भागीदारी दी है. जिला प्रशासन ने आंकड़े को ऐतिहासिक बताते हुए इसे सामाजिक चेतना का प्रतीक भी बताया है. महिला संवाद कार्यक्रम में गांव की महिलाएं अब अपने अधिकारों, योजनाओं और अपने समुदाय की जरूरतों के प्रति जागरूक होकर सरकार से सीधे संवाद कर रही हैं. शुक्रवार को जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक ने सिसवन प्रखंड के माधोपुर, गंगपुर सिसवन पंचायत के सितारा ग्राम संगठन का दौरा किया. जहां 260 से अधिक महिलाएं उपस्थित रहीं. इस दौरान महिलाओं ने न केवल स्थानीय समस्याएं साझा कीं, बल्कि अपने समुदाय के समग्र विकास को लेकर गहरी चिंताएं और ठोस सुझाव भी रखीं. जीविका द्वारा अपने संवाद में बिहार सरकार की सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला गया. उन्होंने बताया कि किस प्रकार राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए आरक्षण, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, महिला सुरक्षा एवं पोषण से जुड़ी योजनाओं, स्थानीय स्तर पर महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रयासों को प्राथमिकता दी है. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने लगातार यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं की जरूरतों को नीति निर्माण में प्राथमिकता मिले और उन्हें सिर्फ लाभार्थी नहीं, भागीदार बनाया जाए. महिलाओं ने संवाद में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षित आवागमन, सामुदायिक केंद्र, रोजगार के अवसर और बेटियों की उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा. जिला प्रशासन का मानना है कि यह इस बात का संकेत हैं कि अब ग्रामीण महिलाएं व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक सोच के साथ समाज के निर्माण में लगी हैं. महिला संवाद का यह अभियान केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि एक नवचेतना आंदोलन बनता जा रहा है. बिहार सरकार और जीविका के संयुक्त प्रयास से यह संवाद अब उस दिशा में बढ़ रहा है, जहां हर गांव की दीदी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन सके और समाज के हर तबके को न्याय, समानता और सम्मान मिले.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPAK MISHRA

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DEEPAK MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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