गली और मोहल्ला साफ होंगे, तो ही बढ़ेगी रैंकिंग
Updated at : 24 Dec 2019 6:04 AM (IST)
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सीवान : स्वच्छता के मामले में राष्ट्रीय रैंकिंग में नाम दर्ज नहीं करा पाने वाली सूबे की शहर और नगर पालिकाएं अब स्वच्छ बिहार अभियान के तहत हर माह अपना रैंकिंग देखेंगी. साथ ही अगले माह सुधारने का प्रयास किया जायेगा. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की दर्जनों फटकार के बाद बिहार सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान […]
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सीवान : स्वच्छता के मामले में राष्ट्रीय रैंकिंग में नाम दर्ज नहीं करा पाने वाली सूबे की शहर और नगर पालिकाएं अब स्वच्छ बिहार अभियान के तहत हर माह अपना रैंकिंग देखेंगी. साथ ही अगले माह सुधारने का प्रयास किया जायेगा. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की दर्जनों फटकार के बाद बिहार सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान से अलग हटकर अपना राज्य स्तरीय स्वच्छता अभियान, स्वच्छ बिहार अभियान चलाने का निर्णय लिया है.
अभियान की मुख्य बात यह है कि भले ही यह स्वच्छ भारत अभियान के तहत मिली राशि से चलाया जायेगा, लेकिन इसका नाम स्वच्छ बिहार अभियान होगा. अबतक राज्य की नगरपालिकाओं से लेकर ग्राम पंचायतों को इसी अभियान के तहत राशि मिलती रही है. जिसमें यह देखा जाता है कि संबंधित विभाग ने इस राशि का दुरुपयोग किसी अन्य कार्य के लिए तो नहीं कर लिया है.
पिछले चार साल से चल रहे स्वच्छ भारत अभियान के तहत बिहार का कोई भी शहर अब तक टॉप 100 की लिस्ट तो दूर 500 में भी अपनी पहचान नहीं बना सका है, और अब राज्य की नगर निगमों, नगरपालिकाओं, नगर परिषदों, नगर पंचायतों से लेकर ग्राम पंचायतों की रैंकिंग मासिक आधार पर की जायेगी. सरकार के इस फैसले से फायदा यह होगा कि राज्य में तो रैंकिंग के नंबर मिल जायेंगे.
साथ ही एनजीटी में यह दिखाने में सुविधा होगी कि हमारे राज्य के इतने शहर स्वच्छता रैंकिंग में नंबर वन से लेकर 99 तक हैं. उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग समग्र स्वच्छता को लेकर रैंकिंग की जाती है. और सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही 60 प्रतिशत अंक मिलते हैं.
सीवान नप की अगले महीने होगी रैंकिंग
सीवान नगर पर्षद इस मामले में कहां है और रहेगा इसका अंदाजा अगले माह होने वाली स्वच्छता रैंकिंग में पता चल जायेगा. शौचालय बनाने के लिए पैसे लोगों के खाते में पहुंचा दिया गया, लेकिन आधे से ज्यादा लोगों ने शौचालय नहीं बने हैं. खुले में शौच को रोकना किसी भी नगर पर्षद के लिए इतना आसान नहीं है. सीवान जैसे शहरों में जहां सार्वजनिक जमीन का घोर अभाव हो.
सीवान शहर की संकरी सड़कों के किनारे इतनी जगह नहीं है कि 1000 मीटर की दूरी पर भी शौचालय और मूत्रालय बनवाए जा सकें. सड़क किनारे रखे कूड़ेदान को लोग उठाकर फेंक देते हैं. नगर पर्षद के सभापति सिंधु सिंह का कहना है कि हम प्रयास कर रहे हैं कि शहर में शौचालयों का निर्माण सार्वजनिक प्रयोग के लिए भी हो. लेकिन सरकारी जमीन का अभाव इसमें आड़े आ रहा है.
इस पर मिलेंगे 100 अंक
सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा नहीं दिखना चाहिए, मल-मूत्र त्याग की व्यवस्था आबादी के अनुपात में हो, महानगरों में 500 मीटर पर तो शहरों और कस्बों में 500 से 1000 मीटर के अंतराल पर सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय होने ही चाहिए, सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग जमा किया जाता हो, कूड़ा निस्तारण और प्रबंधन की व्यवस्था वैज्ञानिक तरीके से होने चाहिए, कूड़े से कंपोस्ट यानी खाद या ऊर्जा उत्पादन के लिए संयंत्र लगे हों, विषैले गैसों के उत्सर्जन को रोका गया हो आदि.
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